डीएमएफ घोटाला : पौने 32 करोड़ की संपत्तियां अटैच, 17 पर पूरक अभियोजन शिकायत

छत्तीसगढ़ संवाददाता
रायपुर, 31 अक्टूबर। ईडी जोनल कार्यालय ने डीएमएफ घोटाले में करीब 31.70 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। इसके साथ ही 17 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय रायपुर में पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल किया है। इसमें सतपाल सिंह चाबड़ा, मंदीप चावला समेत 15 अन्य आरोपियों को शामिल किया गया है।
एजेंसी की जांच में सामने आया है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के कल्याण एवं विकास के लिए निर्धारित डीएमएफ की राशि का सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, छत्तीसगढ़ रबीज निगम के माध्यम से सरकारी अधिकारियों, एजेंटों और बिचौलियों के संगठित नेटवर्क ने इस घोटाले को अंजाम दिया। आरोप है कि डीएमएफ की राशि से ऐसे कार्यों और आपूर्तियों को प्राथमिकता दी गई, जिनमें खरीद की कीमतें बढ़ाकर दिखाई गईं और इसके बदले बड़े पैमाने पर अवैध कमीशन वसूला गया।
ईडी के मुताबिक, एजेंट और बिचौलिये रेट कॉन्ट्रैक्ट धारक कंपनियों को जारी खरीद आदेशों की मूल राशि पर 25 से 50 प्रतिशत तक कमीशन वसूलते थे। इस कमीशन का बड़ा हिस्सा डीएमएफ फंड आवंटित करने, खरीद आदेश जारी करने और भुगतान जारी कराने के बदले सरकारी अधिकारियों तथा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि कमीशन की रकम नकद और बैंकिंग माध्यमों से एकत्र की जाती थी। इसके बाद विभिन्न कंपनियों और बैंक खातों के जरिए रकम को अलग-अलग स्तरों पर स्थानांतरित कर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी। बीज निगम के माध्यम से डीएमएफ के अलावा अन्य मदों से होने वाली खरीदी में भी इसी तरह कमीशन वसूला गया।
ईडी ने अपनी जांच में सतपाल सिंह चाबड़ा को सिंडिकेट का प्रमुख बिचौलिया और वित्तीय समन्वयक बताया गया है। आरोप है कि उसने चुनिंदा विक्रेताओं को काम दिलाने, खरीद आदेश जारी कराने, भुगतान करवाने और अवैध कमीशन के संग्रह व वितरण में अहम भूमिका निभाई। ईडी ने सतपाल सिंह चाबड़ा को 1 सितंबर 26 को गिरफ्तार किया था।
ईडी के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ लगभग 35 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय का पता लगाया गया है। इसके विरुद्ध इस कार्रवाई में करीब 31.70 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई है। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में अब तक आईएएस अधिकारी रानू साहू समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, मामले में अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। इस मामले में सरकारी कर्मचारियों तथा अन्य एजेंटों की भूमिका की जांच अभी जारी है। मामले में आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।



