भाजपा सांसद के पाँच बच्चों वाले आग्रह पर मौलाना साजिद रशीदी बोले, मुसलमानों का न्यूनतम आँकड़ा छह है, सात-आठ या दस बच्चे भी पैदा करें

नई दिल्ली, 4 अक्टूबर। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल के उस आग्रह पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुसलमानों के लिए न्यूनतम आँकड़ा छह बच्चे है और सात, आठ या दस बच्चे भी पैदा किए जा सकते हैं। पटेल ने हिंदू युवाओं से जल्दी शादी करने और पाँच बच्चे पैदा करने की अपील की थी।
आईएएनएस के अनुसार, रशीदी ने कहा कि इन लोगों के लिए मुद्दा जनसंख्या नहीं, बल्कि मुसलमानों की बढ़ती आबादी है। उन्होंने दावा किया कि जिस तरह उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद पर दावा किया गया है, उसी तरह प्रधानमंत्री पद पर दावे की आशंका से ये बातें कही जा रही हैं।
रशीदी ने कहा, “हम कहते हैं, पाँच नहीं, मुसलमान का न्यूनतम अनुपात छह है, इसलिए सात, आठ या दस बच्चे पैदा करें।” उन्होंने जनगणना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, 2011 के बाद जनगणना ठीक से नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तर प्रदेश में तीन करोड़ नाम हटाए गए हैं, जिनमें से उनके अनुमान के अनुसार दो करोड़ मुसलमानों के हो सकते हैं। यह उनका व्यक्तिगत अनुमान है। आधिकारिक आँकड़ों में धर्म के आधार पर इतनी पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं दी गई है।
गजेंद्र सिंह पटेल खरगोन-बड़वानी लोकसभा क्षेत्र से सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं। भाषा के अनुसार, उन्होंने तीन अक्टूबर को मध्य प्रदेश के बड़वानी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पहले लोग 20-22 साल की उम्र में शादी कर लेते थे और चार से सात बच्चे होते थे, जबकि अब शादी 30 से 37 साल की उम्र में होती है और अक्सर एक ही बच्चा होता है। पटेल ने सनातनियों की जन्म दर 1.9 बताई और हिंदू युवाओं से पाँच बच्चे पैदा करने को कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब चार बच्चों में से एक हिंदू समुदाय का और तीन दूसरे समुदाय के होते हैं। दूसरे समुदाय से उनका इशारा मुस्लिम समुदाय की ओर माना गया।
दिसंबर 2025 में भी रशीदी जनसंख्या पर बयान दे चुके हैं। तब भाजपा नेता नवनीत राणा के हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने वाले बयान पर प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा था कि मुसलमान सीना ठोककर कहते हैं कि उनके 10 भी हैं और 12 भी हैं, और वे इसे नहीं रोकते। ताजा बयान में आईएएनएस द्वारा उद्धृत शब्दों में सात, आठ या दस बच्चों का उल्लेख है। छह को उन्होंने न्यूनतम आँकड़ा बताया है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5, 2019-21) के अनुसार, देश की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.0 है। हिंदुओं की टीएफआर 1.94 और मुसलमानों की 2.36 दर्ज की गई थी। दोनों समुदायों में प्रजनन दर पिछले सर्वेक्षणों की तुलना में घटी है। मुसलमानों की दर हिंदुओं से अधिक है, लेकिन छह, आठ या दस बच्चों का आँकड़ा औसत प्रजनन दर नहीं दर्शाता। औसत के हिसाब से मुस्लिम महिलाओं के प्रति जीवनकाल लगभग 2.4 बच्चे दर्ज हुए हैं। कुछ परिवारों में अधिक बच्चे हो सकते हैं, पर यह पूरे समुदाय का सामान्य आँकड़ा नहीं है।
रशीदी के ताजा बयान पर अब तक प्रमुख राजनीतिक दलों की औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। जनसंख्या, जन्म दर और मतदाता सूची संशोधन को लेकर दोनों पक्षों के बयानों ने बहस फिर से तेज कर दी है।



