बड़े मामलों पर ध्यान दें, ऐसे मामलों में एफआईआर क्यों?
स्तन ढंकने पर कर संबंधी फेसबुक पोस्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जशपुर सामाजिक कार्यकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका पर 4 दिसंबर को सुनवाई
छत्तीसगढ़ संवाददाता
नई दिल्ली/रायपुर, 26 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट ने जशपुर जिले में स्तन ढंकने पर लगाए जाने वाले कर से संबंधित फेसबुक पोस्ट के मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने पर सवाल उठाए हैं। जस्टिस आर. महादेवन ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, एफआईआर दर्ज करने की क्या जरूरत है? बड़े मामलों पर ध्यान दीजिए, ऐसे मामलों पर नहीं। यह मामला सामाजिक कार्यकर्ता रूपनारायण एक्का की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा है।
बार एंड बैंच वेबसाइट के मुताबिक जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। एक्का की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि फेसबुक पोस्ट में केवल यह कहा गया था कि महिलाओं के स्तन ढंकने पर कर औरंगजेब ने नहीं, बल्कि किसी ब्राह्मण ने लगाया था। उन्होंने कहा कि यह पोस्ट कोई अपराध नहीं है। इस पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी की कि इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों के पास समय बर्बाद करने के लिए बहुत समय है।
धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
मामला जशपुर जिले के कुनकुरी थाने में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार, एक्का ने 13 अप्रैल 2025 को सोशल मीडिया पर हिंदू महिलाओं के संबंध में कथित आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट की थी। इसके बाद ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष दीपक मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 और 353(2) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं धार्मिक भावनाएं आहत करने और समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने वाली सामग्री से संबंधित हैं।
एक्का की अग्रिम जमानत याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को खारिज कर दी थी। इसके बाद दूसरी याचिका भी 3 जुलाई को खारिज कर दी गई। हाईकोर्ट ने परिस्थितियों में ऐसा कोई ठोस बदलाव नहीं पाया था, जिसके आधार पर अलग निर्णय लिया जा सके। इसके बाद एक्का ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में याचिका पर नोटिस जारी करते हुए जांच में सहयोग की शर्त पर एक्का के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का अंतरिम संरक्षण दिया था। सोमवार की सुनवाई में राज्य की ओर से बताया गया कि एक्का पुलिस थाने में उपस्थित नहीं हुए हैं। इस पर पीठ ने कहा कि उन्हें समन किया जाए, वह उपस्थित होंगे। राज्य की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने पर सुनवाई 4 दिसंबर तक टाल दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक अंतरिम संरक्षण जारी रखने का निर्देश दिया।


