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पीओके आंदोलन पर पूर्व मेजर जनरल राजीव नारायणन की चेतावनी, कहा- ये इस्लामी कट्टरपंथी हैं, अंत में पाकिस्तान का ही साथ देंगे

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ पिछले कई महीनों से चल रहे आंदोलन को भारत में कुछ लोग समर्थन दे रहे हैं, जबकि कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। सेवानिवृत्त मेजर जनरल राजीव नारायणन ने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) के नेता सरदार अमन खान के नेतृत्व वाले इस आंदोलन से सतर्क रहने की बात कही है।

पूर्व मेजर जनरल नारायणन का कहना है कि इन लोगों पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये सभी इस्लामी कट्टरपंथी हैं और लंबी चाल चलते हैं। अंत में ये पाकिस्तान का ही साथ देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कट्टरपंथी सोच लंबे समय की रणनीति पर काम करती है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

जून 2026 से पीओके के रावलकोट, मुजफ्फराबाद और अन्य इलाकों में महंगाई, बिजली बिल, राशन आपूर्ति और शासन संबंधी शिकायतों को लेकर बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। जेएएसी ने 38 सूत्री मांगपत्र पेश किया है। सरदार अमन खान ने कई सभाओं में कहा है कि पीओके पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है, यह कब्जाया हुआ क्षेत्र है और पाकिस्तान को पीओके की जरूरत है, न कि इसके उलट।

प्रदर्शनकारियों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास धरने और पुंछ-मेंढर मार्ग खोलने की भी मांग की है। पाकिस्तानी प्रशासन ने जेएएसी पर प्रतिबंध लगाया है और इसे आतंकवादी संगठन बताया है। दोनों पक्षों में हिंसा की घटनाएं भी हुई हैं।

भारत में दो तरह की प्रतिक्रिया

भारत में कुछ लोग इस आंदोलन को पाकिस्तान के खिलाफ स्थानीय असंतोष के रूप में देख रहे हैं। वहीं पूर्व मेजर जनरल नारायणन जैसे विशेषज्ञों का तर्क है कि क्षेत्र की जनसांख्यिकी और विचारधारा को देखते हुए इसे सीधे भारत के हित में नहीं समझा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सतर्क रुख अपनाया जाए।

सरदार अमन खान ने भारत से मानवीय मदद और एलओसी खोलने की अपील भी की है। हालांकि पाकिस्तान इन मांगों को खारिज करता रहा है।

यह स्थिति अभी भी विकसित हो रही है। पीओके में स्थानीय अधिकारों की मांग और पाकिस्तान की नियंत्रण नीति के बीच तनाव जारी है।

प्रियंका वर्मा

शहर और कस्बे दोनों की दुनिया से परिचित हैं। वे परिवार के बीच रहकर बड़ी हुईं और छोटी उम्र से ही लोगों के चेहरे और बातचीत पर ध्यान देती रही हैं। उन्हें लिखना-पढ़ना, पुराने गीत सुनना और रिश्तेदारों से लंबी बातें करना पसंद है। उनकी नजर उन छोटी बातों पर जाती है जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

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