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पूर्व लोकसेवकों और कार्यकर्ताओं ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी किया ‘जनता का महाभियोग’ नोटिस, इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026। पूर्व वरिष्ठ लोकसेवकों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘चार्जशीट और जनता का महाभियोग नोटिस’ जारी कर उनसे तत्काल इस्तीफा मांगा है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि वे पद नहीं छोड़ते, तो संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत ‘सिद्ध कदाचार’ के आधार पर उन्हें पद से हटाने की मांग की जाएगी।

नोटिस सौंपने के लिए प्रतिनिधिमंडल अशोक रोड स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचा, लेकिन पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग कर उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद समूह ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में नोटिस सार्वजनिक किया। यह संसदीय महाभियोग प्रस्ताव नहीं है, बल्कि नागरिक समूह की ओर से जारी एक सार्वजनिक नोटिस है।

कौन थे प्रतिनिधिमंडल में

हस्ताक्षरकर्ताओं में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लई, पूर्व केंद्रीय सचिव अमिताभ पांडे, पूर्व राजदूत अशोक शर्मा, खुफिया ब्यूरो के पूर्व विशेष निदेशक और पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद, पूर्व लोकसेवक जयश्री मुखर्जी और आशीष जोशी शामिल हैं। नागरिक कार्यकर्ताओं में योगेंद्र यादव, अंजलि भारद्वाज, अमृता जोहरी, आइशे घोष और एन. साई बालाजी भी हैं। रिपोर्टों के अनुसार हस्ताक्षरकर्ताओं की संख्या करीब 15 है।

नोटिस में लगाए गए छह आरोप

चार पन्नों के नोटिस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर छह आरोप लगाए गए हैं। इनमें कहा गया है कि बड़े फैसले, विशेष रूप से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े निर्णय, पूरे आयोग में पर्याप्त चर्चा, परामर्श और दर्ज कार्यवाही के बिना लिए गए। नोटिस में अन्य दो निर्वाचन आयुक्तों द्वारा कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराने का भी जिक्र है।

  • चुनाव आयोग के सामूहिक कामकाज को कमजोर करना।
  • वैधानिक फॉर्म-6 में बिना अधिकार बदलाव को मंजूरी देना।
  • ईसीआईनेट के जरिए मतदाता सूची के प्रशासन को केंद्रीकृत करना।
  • एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना, जिसे नोटिस में अभूतपूर्व मताधिकार-वंचन बताया गया है।
  • स्वतंत्रता और निष्पक्षता के अनुकूल नहीं आचरण।
  • वैधानिक कर्तव्य का बार-बार उल्लंघन।

नोटिस में कहा गया है कि ये कार्य ‘सिद्ध कदाचार’ की श्रेणी में आते हैं और इनसे चुनावी लोकतंत्र की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है। समूह ने लिखा है कि कुमार अपनी नियुक्ति के तरीके और बाद के आचरण के कारण संस्था पर से जनता का भरोसा कमजोर कर चुके हैं, इसलिए उन्हें इस्तीफा देकर आगे की ‘बदनामी’ से बचना चाहिए।

संवैधानिक स्थिति

संविधान का अनुच्छेद 324(5) मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्च सुरक्षा देता है। उन्हें केवल ‘सिद्ध कदाचार या अक्षमता’ के आधार पर और उसी प्रक्रिया से हटाया जा सकता है, जिससे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर हटाया जा सकता है। नागरिक समूह का नोटिस इस संसदीय प्रक्रिया का विकल्प नहीं है।

इससे पहले मार्च 2026 में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव दिए थे। लोकसभा वाले प्रस्ताव पर 130 और राज्यसभा वाले पर 63 सांसदों के हस्ताक्षर बताए गए थे। दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने ये प्रस्ताव खारिज कर दिए थे। कारण सार्वजनिक नहीं किए गए।

पृष्ठभूमि

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे मार्च 2024 में निर्वाचन आयुक्त बने और 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त हुए। आयोग में उनके साथ सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी निर्वाचन आयुक्त हैं। जून 2025 से चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और कई नागरिक समूह आरोप लगा रहे हैं कि पात्र मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर काटे गए। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता रहा है और प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताता है।

सितंबर 2026 के अंत में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। चुनाव आयोग ने उसे फर्जी करार दिया था। इस ताजा नोटिस के जारी होने तक उनके इस्तीफे की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बैरिकेडिंग के बावजूद नोटिस सार्वजनिक कर दिया गया है और वे अपनी मांग पर कायम हैं। चुनाव आयोग की ओर से इस नागरिक नोटिस पर तत्काल कोई औपचारिक प्रतिक्रिया रिपोर्ट नहीं हुई है।

अजय यादव

एक सीधे-सादे स्वभाव के व्यक्ति हैं। बचपन से ही अपने आसपास की बातों को याद रखने की आदत रही। परिवार में बड़ों का आदर और मेहनत की सीख मिली। वे सड़कों पर घूमना, बस-स्टैंड और बाजार की हलचल देखना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि असली तस्वीर वही है जो आम दिन में दिखती है, किसी मंच पर नहीं।

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