छत्तीसगढ़

सीजी पीएससी मेंस की आंसरशीट से गायब हुए चार पन्ने, हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 28 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की मुख्य परीक्षा की उत्तरपुस्तिका से चार पन्ने गायब होने के मामले में हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू की एकल पीठ ने कहा कि मूल्यांकन के दौरान ही आयोग को उत्तरपुस्तिका के पन्ने गायब होने की जानकारी मिल गई थी, फिर भी अभ्यर्थी को सूचित नहीं किया गया और जिम्मेदार व्यक्ति का पता लगाने के लिए ठोस कार्रवाई भी नहीं हुई।

संबंधित अधिकारियों को तीन महीने के भीतर मुआवजे का भुगतान करना होगा।

बिलासपुर निवासी नारायण दत्त ने 2018 की सीजीपीएससी सिविल सेवा भर्ती परीक्षा में हिस्सा लिया था। प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने मुख्य परीक्षा दी, लेकिन चयन नहीं हुआ। इसके बाद सूचना का अधिकार कानून के तहत उत्तरपुस्तिका की प्रति मांगी।

जांच में सामान्य अध्ययन-5 यानी पेपर-7 के भाग-2 की उत्तरपुस्तिका से पृष्ठ क्रमांक 17 से 20 गायब मिले। इन पन्नों पर प्रश्न क्रमांक 9 से 12 के उत्तर लिखे जाने थे, जिनके कुल अंक 30 थे।

नारायण दत्त ने 5 फरवरी 2021 को संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने मूल रिकॉर्ड पेश कराने, स्वतंत्र जांच और 50 लाख मुआवजे की मांग की थी।

आयोग की ओर से कहा गया कि गायब पन्नों के पूरे 30 अंक भी मिल जाते, तब भी अभ्यर्थी के कुल अंक 725.5 होते, जबकि अनारक्षित वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी को 737.5 अंक मिले थे।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन की संभावना नहीं होने की दलील आयोग की जिम्मेदारी खत्म नहीं करती। उत्तरपुस्तिका के पन्ने गायब होने की जानकारी छिपाना, जिम्मेदार व्यक्ति का पता लगाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाना और जांच पूरी नहीं करना गंभीर लापरवाही है। इसी आधार पर मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

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