छत्तीसगढ़

नक्सली हिंसा से पीडि़तों के घाव पर मरहम लगाना जरूरी – अमित शाह

छत्तीसगढ़ संवाददाता
दंतेवाड़ा, 15 अक्टूबर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर और एनएसई फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित एवं जिला प्रशासन के सहयोग से सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत दन्तेवाड़ा में आयोजित नि:शुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर का वर्चुअल शुभारंभ गुरुवार को किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी वर्चुअल शामिल हुए।

उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि नक्सल हिंसा से पीडि़त प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुँचे, उसका समुचित पुनर्वास हो और वह आत्मविश्वास तथा स्वाभिमान के साथ जीवन में आगे बढ़े। इन समन्वित प्रयासों का उद्देश्य प्रत्येक प्रभावित परिवार को सुरक्षा, सम्मान, आजीविका और आगे बढऩे का अवसर देना है। हम ऐसा बस्तर बनाना चाहते हैं, जहाँ बच्चों के सपने भय से मुक्त हों, युवाओं के हाथों में हुनर हो और हर परिवार के जीवन में खुशहाली हो। उन्होंने कहा कि हम प्रभावित लोगों को जीवन में फिर से स्थापित होने का अवसर देना चाहते हैं। यह सरकार का दायित्व है। केवल नक्सलवाद समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है, उससे उत्पन्न पीड़ा और अभाव को दूर करके बस्तर को फिर से हँसता-खेलता बनाना भी हमारी जिम्मेदारी है।

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत इस शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ हो रहा है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में ऐसे सेवामूलक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मुझे प्रसन्नता है कि इस अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से प्रभावित आदिवासी भाई-बहनों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उनके जीवन को सुगम और स्वावलंबी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नक्सल हिंसा में किसी ने हाथ खोया, किसी ने पैर, तो किसी की देखने अथवा सुनने की क्षमता प्रभावित हुई। ऐसे प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचकर उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर देना हमारी साझा जिम्मेदारी है।

राज्य शासन – प्रशासन को धन्यवाद
गृहमंत्री ने कहा कि इस पहल के लिए मैं छत्तीसगढ़ सरकार, जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और सभी सहयोगी संस्थाओं को हृदय से धन्यवाद देता हूँ।
श्री शाह ने कहा कि जगदलपुर में 5-7 अक्टूबर तक आयोजित कार्यक्रम में 3 हजार 6 सौ से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए। इनमें अकेले बस्तर के 1,570 से अधिक लाभार्थी थे। यह संख्या बस्तर की पीड़ा को व्यक्त करती है। पाँच दशकों तक नक्सलवाद ने यहाँ के गरीब और आदिवासी परिवारों को कितने गहरे घाव दिए हैं, इसका अनुमान इन आँकड़ों से लगाया जा सकता है। राजनीतिक उद्देश्यों के लिए आईईडी विस्फोट कर निर्दोश नागरिकों को दिव्यांग बना देना मानवाधिकारों का गंभीर हनन है।

उन्होंने प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के साथ उससे मिले घावों पर मरहम लगाना भी आवश्यक है। प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और सम्मान के साथ जीवन जीने की व्यवस्था करना हमारा संकल्प है। कृत्रिम हाथ किसी व्यक्ति को फिर से काम करने का सामर्थ्य देता है और कृत्रिम पैर उसे दोबारा अपने पैरों पर खड़े होने का विश्वास देता है।

हितग्राही के अनुभव मिला आनंद
गृह मंत्री ने सोशल मीडिया पर इस अभियान के एक लाभार्थी के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि तीन वर्ष बाद वे अपने हाथ से गिलास उठाकर पानी पी सके। उनकी इस उपलब्धि में आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की बहुत बड़ी खुशी समाहित है। यह सुनकर मुझे जो आनंद हुआ, उसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।

उन्होने कहा कि इस पुण्य कार्य में भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर, भारतीय जैन संघ सहित सभी सहयोगियों का योगदान सराहनीय है। मैं मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से कहना चाहता हूँ कि इस अभियान को निरंतर आगे बढ़ाइए। जहाँ भी सहायता की आवश्यकता होगी, भारत सरकार आपके साथ चट्टान की तरह खड़ी रहेगी। हमारा संकल्प है कि नक्सल हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति तक सहायता पहुँचे, उसका समुचित पुनर्वास हो और वह आत्मविश्वास तथा स्वाभिमान के साथ जीवन में आगे बढ़े।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हम प्रभावित लोगों को जीवन में फिर से स्थापित होने का अवसर देना चाहते हैं। यह सरकार का दायित्व है। केवल नक्सलवाद समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं है, उससे उत्पन्न पीड़ा और अभाव को दूर करके बस्तर को फिर से हँसता-खेलता बनाना भी हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस प्रयास में बस्तर के माटी, चालकी, गायता, गुनिया, पुजारी, सिरहा और अन्य पारंपरिक जनजातीय नेतृत्व का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मैं उनके सहयोग और समर्पण के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित भाई-बहनों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र, स्मार्ट वॉकिंग स्टिक, कृत्रिम अंग और कैलीपर जैसे सहायक उपकरण मिलने से उनका दैनिक जीवन सुगम होगा। मुझे विश्वास है कि यह पहल बस्तर में खुशहाली और आत्मविश्वास का नया अध्याय आरंभ करेगी।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से बस्तर में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है। मैं स्वयं बस्तर ओलंपिक में गया हूँ। जिन क्षेत्रों में कभी गोलियों और बम धमाकों की आवाजें सुनाई देती थीं, जहाँ भय का वातावरण था, वहाँ आज हजारों युवा खेलों में भाग लेकर अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं। यह परिवर्तन मन को गहरा संतोष देता है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बस्तर की समृद्ध संस्कृति को रेखांकित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम के माध्यम से जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को सशक्त मंच मिला है। नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत दूरस्थ गाँवों तक बुनियादी सुविधाएँ और शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाया जा रहा है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से देशवासियों को बताना चाहता हूँ कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। पुनर्वास और जनकल्याण के प्रयासों के अंतर्गत लगभग 7,500 लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं। 1,625 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की गई है। साथ ही, 455 लोगों को रोजगार तथा 129 लोगों को भूमि का आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए हैं। 2,300 से अधिक आदिवासी भाई-बहनों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है। लगभग 6,700 नए राशन कार्ड बनाए गए हैं और 2,800 परिवारों तक बिजली पहुँचाई गई है। सड़क निर्माण की 372 नई परियोजनाएँ प्रारंभ की गई हैं तथा 48,526 लोगों के आधार कार्ड बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 44 पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।

उन्होंने माओवाद पीडि़तों के पुर्नवास हेतु सरकार की प्रतिबद्धता को दुहराते हुए कहा कि इन प्रयासों का उद्देश्य प्रत्येक प्रभावित परिवार को सुरक्षा, सम्मान, आजीविका और आगे बढऩे का अवसर देना है। हम ऐसा बस्तर बनाना चाहते हैं, जहाँ बच्चों के सपने भय से मुक्त हों, युवाओं के हाथों में हुनर हो और हर परिवार के जीवन में खुशहाली हो। बस्तर में स्थापित सुरक्षा शिविरों ने लोगों को सुरक्षित वातावरण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब हमने तय किया है कि 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा के रूप में विकसित किया जाएगा। जिन स्थानों पर हमारे जवानों ने आपकी सुरक्षा सुनिश्चित की, वहीं अब भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी बैठकर विकसित बस्तर की नींव मजबूत करेंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई, युवाओं के रोजगार तथा आदिवासी परिवारों की जरूरतों का ध्यान रखा जाएगा। किसानों की धान खरीदी से लेकर पात्र परिवारों को नि:शुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराने तक, जनकल्याण की सुविधाएँ लोगों तक पहुँचाई जाएँगी। मुझे विश्वास है कि ये सेवा केंद्र बस्तर को आगे बढ़ाने के हमारे संकल्प को साकार करेंगे।

उन्होंने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का पुन: हृदय से धन्यवाद देते हुए कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से आपने नक्सल हिंसा से प्रभावित हजारों लोगों के जीवन में आशा और आत्मविश्वास का नया उजियारा फैलाया है। इस सेवाकार्य से जुड़ी सभी सहयोगी संस्थाओं का भी देश के गृहमंत्री के नाते हृदयपूर्वक आभार व्यक्त करता हूँ। आपने वर्षों से पीड़ा झेल रहे लोगों को आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ नया जीवन जीने का मार्ग दिखाया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने दिव्यांगजनों से किया संवाद
इस अवसर पर केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने दिव्यांगजनों से संवाद कर उन्हें अपनी शुभकामनाएँ दी। इस दौरान सुकमा के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के समय आईईडी ब्लास्ट से बांया पैर क्षतिग्रस्त हो गया और इस पैर को काटना पड़ा। अब कृत्रिम पैर लगाने के बाद दोनों पैर से चलकर देश की सेवा के लिए फिर से तैयार हूं।

धर्मारम बीजापुर के दिव्यांग ग्रामीण चंद्रैया सपका ने स्थानीय गोंडी बोली में बताया कि 2012 में घर से चिंतावागु नदी में मछली पकडऩे के लिए जाते वक्त माओवादियों के लगाए गए आईईडी विस्फोट के कारण दांया पैर खो दिया और बाद में उक्त पैर को काटना पड़ा। आज इस शिविर में कृत्रिम पैर लगाने से वह दोनों पैर से चल रहे हैं, यह उनके लिए यादगार लम्हा है। वहीं जावंगा एवं मेटापाल दंतेवाड़ा के जन्मजात अस्थिबाधित अजय सोरी एवं कोसी पोडियाम ने नि:शुल्क दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर में ट्राइसाइकिल मिलने से ख़ुशी जताई और अब आने-जाने हेतु सहूलियत होने की बात कहते हुए सरकार को धन्यवाद दिया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वर्चुअल शारदीय नवरात्रि की बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए माँ दंतेश्वरी से प्रदेशवासियों की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की और कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई में अपने प्राणों की आहुति देने वाले हमारे वीर जवानों और नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले ग्रामीण भाई-बहनों को मैं श्रद्धापूर्वक नमन करता हूँ।

यह हमारा सौभाग्य है कि छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार बनने के साथ ही हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मार्गदर्शन और आशीर्वाद मिला। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ नक्सलवाद को समाप्त करने का संकल्प लिया और इसके लिए 31 मार्च 2026 की समय-सीमा निर्धारित की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी ऐसा लगता था कि पता नहीं छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त होगा भी या नहीं, लेकिन आज हम इसे समाप्त करने में सफल हुए हैं। इसके लिए मैं छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और विशेष रूप से बस्तरवासियों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

हम अपने वीर जवानों के अदम्य साहस और पराक्रम को भी नमन करते हैं। इस लड़ाई में बस्तर की जनता का भरपूर सहयोग और आशीर्वाद मिला। यहाँ के लोग नक्सलवाद से मुक्ति चाहते थे और विकास की मुख्यधारा से जुडऩा चाहते थे। मैं जनता-जनार्दन का भी हृदय से धन्यवाद करता हूँ। लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण हमारा बस्तर विकास में पीछे रहा। अब हमें बस्तर को तेज गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है। इसके लिए भारत सरकार, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का पूरा सहयोग मिल रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री ने आश्वस्त किया है कि बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से हम दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास और जनसुविधाएँ पहुँचा रहे हैं। आज 500 से अधिक गाँवों में सड़क और बिजली पहुँची है। घरों तक नल से जल पहुँचाने तथा दूरसंचार सुविधाओं के विस्तार का काम चल रहा है। इन क्षेत्रों में 431 स्कूल खुले हैं और अस्पताल खोले जा रहे हैं। पहले लोगों के राशन कार्ड तक नहीं बन पाते थे और राशन लेने के लिए कई दिनों का समय लग जाता था। अब गाँवों में ही राशन दुकानें खोलकर उनकी कठिनाइयाँ दूर की जा रही हैं। इस तरह हम सेवा और विकास के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दुहराते हुए कहा कि खाली हो रहे सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा के रूप में परिवर्तित करने का भी हमारी सरकार का संकल्प है। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप इन केंद्रों में प्रशिक्षण देकर लोगों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। वीर गुंडाधुर जी के गाँव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया गया है। वहाँ सिलाई-कढ़ाई का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बस्तर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसे काम भी शुरू किए गए हैं। आने वाले समय में अन्य सेवा डेरों में भी विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियाँ संचालित की जाएंगी।

उन्होंने कहा कि हम बस्तर में खेती और पशुपालन को भी बढ़ावा दे रहे हैं। परिवारों को दो-दो गायें उपलब्ध कराई जा रही हैं। डेयरी विकास के लिए भी समझौता किया गया है। हमारा प्रयास है कि यहाँ के परिवारों की आय बढ़े और वे समृद्धि की ओर आगे बढ़ें। इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई योजनाओं के लिए लगभग दो हजार करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इनके तैयार होने से लगभग 80 हजार एकड़ क्षेत्र में सिंचाई संभव होगी और किसानों के खेतों तक पानी पहुँचेगा। इस प्रकार हम बस्तर में विकास कार्यों को निरंतर गति दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हमें भारत सरकार, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री का पूरा सहयोग प्राप्त है। हम अपने संसाधनों से भी पूरे बस्तर क्षेत्र को विकास की दृष्टि से आगे बढ़ाएंगे।

उन्होंने कहा कि आज दन्तेवाड़ा में दिव्यांग सहायता समारोह का आयोजन किया गया है। हम सभी जानते हैं कि नक्सली हिंसा का शिकार होकर अनेक निर्दोष लोगों ने अपने हाथ-पैर खोए हैं। आईईडी विस्फोटों ने उन्हें जीवनभर की पीड़ा दी है। ऐसे हमारे भाई-बहनों की सहायता के लिए राज्य सरकार और जयपुर की संस्था मिलकर कार्य कर रही हैं। उन्हें कृत्रिम अंग, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र तथा अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
आईईडी विस्फोटों में दिव्यांग हुए हमारे 30 भाई-बहनों को कृत्रिम अंग प्रदान किए जा रहे हैं। इस आयोजन में दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 लोगों को सहायक उपकरणों से लाभान्वित किया जा रहा है। निश्चित रूप से ये उपकरण उनके दैनिक जीवन को सुगम बनाने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में सहायक होंगे। जिन्होंने अपने पैर खोए हैं, वे कृत्रिम पैरों की सहायता से फिर चल-फिर सकेंगे। उन्होंने इस सेवा कार्य में सहयोग देने वाली जयपुर की संस्था का भी हृदय से आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा -हमारे लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से जुड़ चुके हैं। मैं छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता की ओर से उनका हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूँ। उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति से ही आज हमारा बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हो पाया है।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर के माओवाद पीडि़तों की मार्मिक कहानियां साझा करते हुए कहा कि आईईडी किसी को नहीं पहचानता था। एक छोटी बच्ची अपने गांव में घूम रही थी, तभी उसका पैर आईईडी पर पड़ गया और विस्फोट में वह गंभीर रूप से घायल हो गई। एक किसान अपने खेत की मेड़ पर चल रहा था, जहां आईईडी लगाया गया था। विस्फोट में उस किसान ने अपना पैर खो दिया। किसी ने अपने हाथ खोए, किसी ने पैर तो किसी ने अपनी आंखों की रोशनी गंवा दी। यहां तक कि अनेक पशु भी आईईडी विस्फोटों का शिकार हुए। नक्सल हिंसा ने बस्तर के निर्दोष लोगों को ऐसी पीड़ा दी, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि इतनी पीड़ा और कठिन परिस्थितियों के बावजूद बस्तर की जनता के मन में नक्सलवाद से मुक्ति का दृढ़ संकल्प था। उसी संकल्प का परिणाम है कि आज बस्तर नक्सलवाद से मुक्त हुआ है। आज इस शिविर में ऐसे 24 आईईडी पीडि़तों को कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, श्रवण यंत्र, ट्राइसिकल सहित विभिन्न सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे फिर से आत्मनिर्भर होकर सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें।

उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज निर्देश दिए हैं कि यह कार्य यहीं नहीं रुकना चाहिए। मैं और मेरे साथ बस्तर के सभी जनप्रतिनिधि यह संकल्प लेते हैं कि जब भी आवश्यकता होगी, हम पीडि़तों की सहायता के लिए आगे आएंगे। बस्तर के लोगों की सेवा और उनके पुनर्वास का यह संकल्प अनवरत जारी रहेगा। बस्तर की जनता ने जिस विश्वास और संकल्प के साथ नक्सलवाद से मुक्ति का सपना देखा था, उसे पूर्णता तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

768 दिव्यांगों को मिलेगा लाभ
दन्तेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय नि:शुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर में 768 दिव्यांगजनों को लाभान्वित किया जाएगा। जिसमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 दिव्यांगजन शामिल हैं। इस मौके पर सांसद महेश कश्यप, विधायक चैतराम अटामी, ओजस्वी मंडावी, अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, जानकी कोरसा कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी बीएन मीणा, कलेक्टर देवेश कुमार, एसपी चन्द्रमोहन सिंह, सीईओ एम. भार्गव तथा भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर और एनएसई फाउंडेशन एवं भारतीय जैन संघटना के पदाधिकारी और बड़ी सख्या में नागरिक मौजूद थे।

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