पेटा इंडिया ने केंद्र से 2 अक्टूबर से मांस विज्ञापनों पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध लगाने की मांग की

पशु अधिकार संगठन पेटा इंडिया ने केंद्र सरकार से गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर से देशभर में मांस के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है। संगठन ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर बिलबोर्ड, टेलीविजन, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और अन्य माध्यमों पर मांस के प्रचार पर रोक लगाने की मांग की है।
पेटा इंडिया की वीगन एंड कॉरपोरेट प्रोजेक्ट्स की वरिष्ठ प्रबंधक डॉ. किरण आहूजा ने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी की अहिंसा की विरासत का सम्मान होगा। उन्होंने कहा कि संगठन चाहता है कि देश में मांस विज्ञापन बंद कर भारत की करुणामय, स्वस्थ और टिकाऊ मांस-मुक्त खाद्य परंपराओं को बढ़ावा दिया जाए।
संगठन ने पशु कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संबंधी चिंताओं का हवाला दिया है। पेटा इंडिया के अनुसार, मांस का हर विज्ञापन ऐसे उत्पाद को बढ़ावा देता है जिससे जानवरों को पीड़ा होती है तथा मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। संगठन ने यूरोप के कुछ शहरों का उदाहरण दिया है, जहां मांस विज्ञापनों पर प्रतिबंध या पाबंदी लगाई गई है। इनमें एम्स्टर्डम, हार्लेम, यूट्रेक्ट और निजमेगन शामिल हैं।
पत्र में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध, आहार संबंधी बीमारियों और एच5एन1 बर्ड फ्लू के जोखिम का भी उल्लेख किया गया है। पेटा इंडिया का कहना है कि दुनियाभर में इस्तेमाल होने वाले एंटीमाइक्रोबियल्स का बड़ा हिस्सा खाद्य पशुओं में लगाया जाता है। संगठन ने यह भी कहा कि भारत में अहिंसा पर आधारित मांस-मुक्त भोजन की लंबी परंपरा है और यहां शाकाहारियों की बड़ी आबादी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं को मांस-मुक्त व्यंजन परोसे जाने का भी जिक्र किया गया।
यह मांग विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाने से संबंधित है। मांस की बिक्री या उपभोग पर प्रतिबंध की बात नहीं की गई है। फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक निर्णय या अधिसूचना जारी नहीं हुई है।



