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स्वीकृति की प्रतीक्षा में डेढ़ वर्ष से कागजों में झूल रहा लक्ष्मण झूला

राजनांदगांव: मोहारा में शिवनाथ नदी पर प्रस्तावित लक्ष्मण झूले पर तकनीकी स्वीकृति का ग्रहण नहीं हट पा रहा है। पहले इसे वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया गया। फिर दूसरे वर्ष स्वयं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसकी घोषणा की। इस बीच जल संसाधन विभाग ने दो बार डीपीआर बनाई, लेकिन तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण बहुप्रतीक्षित काम कागजों में ही झूल रहा है। विधानसभा अध्यक्ष डा. रमन सिंह की पहल पर बनने वाले इस ब्रिज के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट प्रविधान है। मेला स्थल से आक्सीजोन वाले हिस्से में रायपुर के महादेव घाट की तर्ज पर ब्रिज के साथ सुंदर उद्यान भी बनाया जाना है।

संस्कारधानी राजनांदगांव की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी के मोहारा तट को एक बड़े और भव्य टूरिस्ट स्पाट के रूप में विकसित करने की योजना सरकारी लेटलतीफी और प्रशासनिक उपेक्षा की भेंट चढ़ती दिख रही है। रायपुर में खारून नदी (महादेव घाट) पर बने राज्य के पहले सस्पेंशन ब्रिज (लक्ष्मण झूला) की भारी सफलता के बाद, राजनांदगांव में भी ठीक उसी तर्ज पर लक्ष्मण झूला की घोषणा की गई थीं। इस योजना के तहत नदी के दोनों छोरों को जोड़ते हुए एक आकर्षक हैंगिंग ब्रिज, नदी किनारे सर्वसुविधायुक्त गार्डन, बच्चों के लिए प्ले-एरिया, चौपाटी और आकर्षक लाइटिंग की व्यवस्था की जानी थी। उम्मीद थी कि इससे न केवल राजनांदगांव बल्कि आसपास के जिलों के लिए भी यह आकर्षण का केंद्र बनेगा। लेकिन, शासन की लालफीताशाही के कारण यह पूरा प्रोजेक्ट फाइलों में बंद धूल खा रहा है।

 सवा सौ साल पुराने ‘मोहारा मेला’ को मिल सकता है बड़ा बूस्ट

शहर के मोहारा तट पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर सवा सौ साल से भी अधिक पुराना ऐतिहासिक मेला लगता है। तीन दिवसीय यह मेला आसपास के क्षेत्र के लिए बड़ा धार्मिक आयोजन है। यदि यहां रायपुर के महादेव घाट जैसा लक्ष्मण झूला बन जाता, तो धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ यह सालभर चलने वाला एक जीवंत पिकनिक स्पाट बन जाता। वर्तमान में उचित सुंदरीकरण और सुरक्षा व्यवस्था न होने से बाढ़ के दिनों में यहां खतरा बना रहता है, जबकि एक सुव्यवस्थित सस्पेंशन ब्रिज इस पूरे क्षेत्र की सूरत बदल सकता था।

उपेक्षित आक्सी जोन को संवारने का सपना भी अधूरा

राज्य सरकार ने शिवनाथ नदी के तटीय क्षेत्रों को संवारने के लिए लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपये की कार्ययोजना पृथक से बना रखी है। इसमें सुंदरीकरण के अतिरिक्त कई अधोसंरचनागत काम भी प्रस्तावित हैं। साथ ही प्राकृतिक सौंदर्य से लबरेज उपेक्षित आक्सी जोन को भी पुन: विकसित करना भी इसी योजना का एक हिस्सा था, लेकिन वह भी केवल कागजों में ही है। वर्तमान में यह पूरा क्षेत्र अवैध गतिविधियों के लिए बड़ा अड्ढा बन गया है। इV सब कामों को लेकर राजनीतिक इच्छा शक्ति की भी कमी देखी जा रही है।

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