विश्व

डीआर कांगो में इबोला से 4,000 से अधिक मौतें, पुष्ट मामले लगभग 8,300

लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में चल रहे इबोला प्रकोप में सरकारी आंकड़ों के अनुसार 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों में लगभग 8,300 पुष्ट मामलों में 4,018 मौतें दर्ज की गई हैं। ये मामले सात प्रांतों के दर्जनों स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैले हैं। अब तक 2,000 से अधिक मरीज ठीक होकर घर लौट चुके हैं।

यह प्रकोप बुंडिबुग्यो वायरस से फैला है और मई 2026 में पूर्वी कांगो में घोषित किया गया था। अधिकारियों के अनुसार यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बन चुका है। विश्व स्तर पर यह 2014–2016 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्रकोप है। उस प्रकोप में गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से अधिक संक्रमण और 11,000 से अधिक मौतें हुई थीं। मौजूदा प्रकोप में कच्ची मृत्यु दर लगभग 48 प्रतिशत है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 23 सितंबर तक के आंकड़ों में 7,890 पुष्ट मामले और 3,799 मौतें थीं, जबकि 1,966 मरीज ठीक हो चुके थे। 27 सितंबर तक मानवीय एजेंसियों के संकलन में पुष्ट मामले 8,116 और मौतें 3,924 पहुँच गई थीं। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने मृत्यु संख्या 4,000 के पार बताई। सबसे अधिक असर इतुरी प्रांत पर है। नॉर्थ किवु, ओट-उएले, त्शोपो, बा-उएले, साउथ किवु और सुद-उबांगी में भी मामले सामने आए हैं।

मेडेसिंस सान्स फ्रंटियर्स (डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स) ने चेतावनी दी है कि असुरक्षा और निगरानी की कमियों के कारण वास्तविक आंकड़ा सरकारी संख्या से अधिक हो सकता है। संगठन ने पुष्टि की कि प्रतिक्रिया कार्य में लगे उसके एक कर्मचारी का बुंडिबुग्यो वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया है। इस चिकित्सक को सख्त चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत नीदरलैंड भेजा गया, जहाँ लीडेन विश्वविद्यालय चिकित्सा केंद्र की उच्च-स्तरीय आइसोलेशन इकाई में इलाज चल रहा है। प्रकोप के दौरान 50 से अधिक स्वास्थ्य कर्मियों की वायरस से मौत हो चुकी है।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पूर्वी कांगो में बढ़ती हिंसा प्रतिक्रिया को और बाधित कर रही है। इतुरी प्रांत के किगोंजे विस्थापन शिविर में संदिग्ध मरीजों के एक प्रमुख ट्रांजिट केंद्र में आग लग गई। इस शिविर में हिंसा से भागे करीब 19,000 लोग रह रहे थे। गोलीबारी और सशस्त्र तलाशी की खबरों के बाद हजारों लोग शिविर छोड़कर चले गए। संयुक्त राष्ट्र के इबोला प्रतिक्रिया अधिकारी जूलियन हार्निस ने कहा कि केंद्र के नष्ट होने से इलाज की क्षमता घटी है और जरूरतमंदों तक देखभाल पहुँचना कठिन हो गया है। विस्थापित लोगों की आवाजाही से संपर्क ट्रेसिंग और संक्रमण रोकना और मुश्किल हो सकता है।

अधिकारियों के अनुसार नए मामलों की रफ्तार कुछ क्षेत्रों में पहले के शिखर से घटी है, लेकिन सामुदायिक मौतें अब भी बड़ी चिंता हैं। कई मौतें अस्पताल पहुँचने से पहले हो रही हैं, जिससे जल्दी पहचान और समय पर इलाज की कमी साफ होती है। प्रकोप अब भी कई प्रांतों में सक्रिय है और नए स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैलने का खतरा बना हुआ है।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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