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हार के बाद चुनाव आयोग और ईवीएम पर सवाल उठाना कांग्रेस के डीएनए में: शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल उठाना तथा जनता के जनादेश का अपमान करना पार्टी की पुरानी आदत है और उसके डीएनए का हिस्सा है। उन्होंने यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के उन टिप्पणियों के संदर्भ में दिया, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को अवैध बताया गया था।

चौहान ने अपने एक्स हैंडल पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे मजबूत लोकतंत्र है और दुनिया इसके उदाहरण देती है। लेकिन लोकतंत्र का अपमान करना, संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करना, चुनाव हारने पर चुनाव आयोग को बदनाम करना और जनता के जनादेश का अपमान करना कांग्रेस के डीएनए में है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर दिया गया और यह 140 करोड़ भारतीयों के लोकतांत्रिक विवेक का अपमान है।

जीत पर आयोग ठीक, हार पर खराब

केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी चुनाव जीत जाए तो चुनाव आयोग ठीक और हार जाए तो चुनाव आयोग खराब हो जाता है। उन्होंने पूछा कि कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने इन्हीं ईवीएम से चुनाव कैसे जीते। चौहान ने कहा कि जब परिणाम पक्ष में होते हैं तो मशीनों और प्रक्रिया पर कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन हार के बाद वही व्यवस्था संदेह के घेरे में आ जाती है।

उन्होंने ईवीएम की जगह मतपत्र से चुनाव कराने की विपक्षी मांग को भी खारिज किया। चौहान का कहना था कि कांग्रेस देश को 1980 और 1990 के दशक के उस दौर में वापस ले जाना चाहती है, जब बूथ कैप्चरिंग की घटनाएं होती थीं और एक व्यक्ति सारे मतपत्रों पर मुहर लगा देता था। उन्होंने कहा कि तकनीक से चुनाव पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए होते हैं और कांग्रेस को इसका विरोध नहीं करना चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और मतदाता सूची

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी कांग्रेस की आलोचना को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ है और चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हैं। मतदाता सूची के अद्यतन को लेकर उन्होंने कहा कि डुप्लीकेट नाम हटाना और योग्य मतदाताओं को जोड़ना चुनाव आयोग की सतत वैधानिक प्रक्रिया है, जिसमें दावे और आपत्तियां दर्ज होती हैं।

यह बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। इससे पहले 30 सितंबर को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी चौहान ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे जीतें तो लोकतंत्र जिंदाबाद और हारें तो चुनाव आयोग मुर्दाबाद। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों का खंडन किया गया है और पार्टी चुनाव आयोग तथा भाजपा के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाती रही है।

अनीता शर्मा

एक संवेदनशील और शांत स्वभाव की महिला हैं। घर-परिवार के बीच रहकर उन्होंने ज़िंदगी के छोटे-छोटे पड़ावों को करीब से देखा है। उन्हें सुबह की सैर, घर के आंगन में बैठकर चाय पीना और पुरानी पत्रिकाएँ पढ़ना पसंद है। वे आसपास के लोगों के सुख-दुख को दिल से महसूस करती हैं। उनकी सोच साफ और सीधी है — जो दिखे, वही कहें, बिना बढ़ा-चढ़ाए।

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