फ्लाईदुबई घटना पर प्रियंका चतुर्वेदी का दार्शनिक एंगल, कैप्टन ने बताया हनुमान चालीसा का पाठ

नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई घटना को एक बार फिर याद करते हुए भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर दार्शनिक नजरिया रखा है। उन्होंने कहा कि इस घटना के रिकॉर्ड और रिपोर्ट में कैप्टन की असाधारण हिम्मत दर्ज है, लेकिन इसे आस्था और आंतरिक मजबूती के नजरिए से भी देखा जा सकता है।
प्रियंका के मुताबिक, जैसे-जैसे जानकारी सामने आ रही है, कैप्टन के बयान से यह संकेत मिलता है कि संकट के क्षण में उनकी आस्था ने उन्हें संभाले रखा। उन्होंने लिखा कि आस्था मुश्किल समय में अचानक नहीं बनती, बल्कि मुश्किल समय उसे उजागर करता है। जब बाहर उथल-पुथल हो, तब प्राचीन वचनों पर भरोसा मन को एक स्थिर ठिकाना दे सकता है।
फ्लाइट में क्या हुआ
30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान में करीब 174 लोग सवार थे। उड़ान के करीब ढाई घंटे बाद कॉकपिट में ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया। संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल हमाद सैफ अल शम्सी ने 3 अक्टूबर को कहा कि जांच में को-पायलट द्वारा आतंकी कृत्य करने की कोशिश पाई गई है। उनके अनुसार, को-पायलट ने उड़ान के दौरान कैप्टन पर क्रैश ऐक्स से हमला किया और विमान के नियंत्रण लेने की कोशिश की।
हमले के दौरान बोइंग 737 मैक्स 8 की ऊंचाई तेजी से घटी। अलग-अलग रिपोर्टों में गिरावट करीब 14,000 से 17,000 फीट बताई गई है। विमान ने इमरजेंसी सिग्नल भेजा और बाद में हाईजैक कोड 7500 भी दर्ज हुआ। कैप्टन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। यात्रियों और क्रू ने को-पायलट को काबू किया। फ्लाइट में मौजूद रिजर्व पायलटों ने विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतारा।
कैप्टन का बयान
अस्पताल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वीडियो बातचीत में कैप्टन मच्छार ने कहा कि वे फर्श पर घायल पड़े थे और विमान नीचे जा रहा था। उन्होंने खुद से कहा कि यह आखिरी कोशिश है और दरवाजा यहीं है। उन्होंने बताया कि वे अपनी जान के लिए लड़ रहे थे, लेकिन साथ ही यह भी जानते थे कि बाकी लोगों को मरने नहीं देंगे।
उसी बातचीत में कैप्टन ने कहा कि जब भी उन्हें डर या तकलीफ होती है, वे हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। उस घटना के दौरान भी वे चालीसा पढ़ रहे थे और मानते हैं कि ईश्वर की कृपा उन पर रही। उन्होंने यह भी कहा कि वे देश से दूर हैं, संस्कृति से नहीं। प्रधानमंत्री ने उनकी सूझबूझ और साहस की सराहना की।
दार्शनिक एंगल
प्रियंका चतुर्वेदी ने इसी बात को केंद्र में रखते हुए लिखा कि यह चमत्कार की गुहार नहीं, बल्कि आस्था और मानसिक मजबूती का संकेत था। उनके अनुसार, रोजमर्रा के छोटे धार्मिक अभ्यास संकट में व्यक्ति को अकेलेपन से बचा सकते हैं और बेबसी को हिम्मत में बदल सकते हैं। उन्होंने महामारी के समय भरोसे की भूमिका का भी जिक्र किया और कहा कि विश्वास मुश्किलों को देखने का नजरिया बदल देता है।
इससे पहले प्रियंका ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि क्या हमलावर को-पायलट को पाकिस्तान में प्रशिक्षण मिला था। यह दावा अब तक किसी आधिकारिक जांच में पुष्ट नहीं हुआ है। जांच संयुक्त अरब अमीरात की अगुवाई में चल रही है। मकसद, पूर्व योजना और संभावित लिंक अभी जांच के दायरे में हैं। कैप्टन मच्छार का इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है।



