स्वामी प्रसाद मौर्य ने राहुल गांधी से की मुलाकात, अपनी जनता पार्टी के इंडिया गठबंधन में शामिल होने का किया ऐलान

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को दिल्ली के 10 जनपथ पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। इस बैठक में वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद रहे। मुलाकात के बाद मौर्य ने कहा कि उनकी पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ेगी।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया पर बैठक की तस्वीरें भी साझा कीं। एक तस्वीर में वे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ दिख रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में राजेंद्र पाल गौतम भी शामिल हैं। बैठक की खबरों और तस्वीरों के बाद यूपी की सियासत में सपा-कांग्रेस गठबंधन के दायरे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या कहा स्वामी प्रसाद मौर्य ने
मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए मौर्य ने कहा कि अपनी जनता पार्टी अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा होगी। उन्होंने बताया कि यह पहली औपचारिक बैठक थी और बातचीत सकारात्मक रही। सीटों की संख्या और आगे की रणनीति पर बाद में निर्णय होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल पार्टी के विलय की नहीं, बल्कि गठबंधन में साथ चुनाव लड़ने की बात हुई है।
मौर्य ने कहा कि उनका लक्ष्य भाजपा को हटाना, देश और संविधान को बचाना है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं और उनकी पार्टी भी उत्तर प्रदेश में इन्हीं मुद्दों पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहते हैं कि राहुल गांधी देश के अगले प्रधानमंत्री बनें। राजेंद्र पाल गौतम ने इस मुलाकात की पहल में भूमिका निभाई।
सपा से दूरी और नई पार्टी
स्वामी प्रसाद मौर्य का राजनीतिक सफर कई दलों से जुड़ा रहा है। वे लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी में रहे और मायावती सरकार में मंत्री भी रहे। वर्ष 2016 में बसपा छोड़कर वे भाजपा में शामिल हुए और योगी आदित्यनाथ सरकार में श्रम मंत्री रहे। जनवरी 2022 में, विधानसभा चुनाव से पहले, उन्होंने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का साथ दिया।
सपा के साथ उनका रिश्ता भी लंबे समय तक नहीं चला। फरवरी 2024 में उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता और सपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया तथा नई पार्टी बनाई। बाद में उन्होंने अपनी जनता पार्टी का गठन किया, जिसके वे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। वर्ष 2022 के चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने अखिलेश यादव का साथ नहीं छोड़ा था। सपा से अलग होने का फैसला 2024 में हुआ।
गठबंधन पर सियासी चर्चा
समाजवादी पार्टी यह कहती रही है कि 2024 के लोकसभा चुनाव की तरह इस बार भी कांग्रेस के साथ पुराना गठबंधन कायम रहेगा। ऐसे में मौर्य की कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात और इंडिया गठबंधन में शामिल होने के ऐलान को सपा खेमे के लिए नई राजनीतिक स्थिति के रूप में देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कांग्रेस और सपा नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद मौर्य को गठबंधन में जगह देने पर सहमति बनी है, हालांकि इस पर आधिकारिक संयुक्त घोषणा अभी सामने नहीं आई है।
रायबरेली की ऊंचाहार सीट को लेकर भी अटकलें हैं। इस सीट के विधायक मनोज पांडेय पहले समाजवादी पार्टी में थे और अब भाजपा सरकार में मंत्री हैं। स्थानीय चर्चाओं में मौर्य या उनके बेटे उत्कृष्ट मौर्य के इस सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जाती रही है, लेकिन 3 अक्टूबर की बैठक में किसी खास सीट के टिकट पर सहमति की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौर्य खुद कह चुके हैं कि सीटों का फैसला बाद में होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। इस बैठक को विपक्षी दलों की तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है, लेकिन सीट बंटवारे और गठबंधन की अंतिम रूपरेखा अभी तय होनी बाकी है।



