छत्तीसगढ़

सिंगापुर के मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व पहुंचे सीएम साय, छत्तीसगढ़ के लिए इको-टूरिज्म मॉडल पर जोर

रायपुर/सिंगापुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को सिंगापुर के मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी मौजूद रहे। दोनों ने रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवास के प्रबंधन और पर्यटक सुविधाओं की व्यवस्था का अवलोकन किया।

मंडाई सिंगापुर का प्रमुख वन्यजीव और प्रकृति पर्यटन केंद्र है। यहां सिंगापुर जू, नाइट सफारी और रिवर वंडर्स जैसी सुविधाएं हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सिंगापुर के अनुभवों से सीख लेकर छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप इको-टूरिज्म का मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिसमें संरक्षण के साथ पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा मिले।

साय भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में भाग लेने पहुंचे हैं। यह फोरम सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के सहयोग से आयोजित हो रहा है। मुख्य कार्यक्रम सोमवार, 5 अक्टूबर को है। उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य निवेशकों से बातचीत और राज्य में आर्थिक साझेदारी की संभावनाएं तलाशना है।

इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ का दर्ज वन क्षेत्र भौगोलिक क्षेत्रफल का करीब 44 प्रतिशत है। बस्तर से सरगुजा तक फैले जंगल, समृद्ध जैव विविधता तथा राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य राज्य को इको-टूरिज्म के लिए आधार देते हैं। सरकार इन संसाधनों को बेहतर पर्यटक सुविधाओं और स्थानीय भागीदारी से जोड़कर पर्यटन की नई संभावनाएं तलाश रही है।

मंडाई वाइल्डलाइफ रिजर्व में मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक परिवेश में वन्यजीव संरक्षण, पर्यटकों के अनुभव, प्रबंधन व्यवस्था और जागरूकता गतिविधियों का अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास का मॉडल राज्य की भौगोलिक और जैव विविधता संबंधी विशेषताओं के अनुरूप होना चाहिए।

साय ने स्पष्ट किया कि सिंगापुर की व्यवस्थाओं को हूबहू अपनाने के बजाय वहां के सफल अनुभवों को छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुसार उपयोग में लाया जाएगा। लक्ष्य ऐसा इको-टूरिज्म मॉडल तैयार करना है, जिसमें जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहें तथा स्थानीय समुदायों, युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आय के नए अवसर बनें।

बस्तर, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, अचानकमार टाइगर रिजर्व, इंद्रावती और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्र राज्य की प्राकृतिक पर्यटन क्षमता को दर्शाते हैं। इन क्षेत्रों में संरक्षण, स्थानीय भागीदारी और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का समन्वय राज्य को इको-टूरिज्म के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर मजबूत करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।

प्रियंका वर्मा

शहर और कस्बे दोनों की दुनिया से परिचित हैं। वे परिवार के बीच रहकर बड़ी हुईं और छोटी उम्र से ही लोगों के चेहरे और बातचीत पर ध्यान देती रही हैं। उन्हें लिखना-पढ़ना, पुराने गीत सुनना और रिश्तेदारों से लंबी बातें करना पसंद है। उनकी नजर उन छोटी बातों पर जाती है जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

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