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हिंदी विश्‍वविद्यालय में विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दिवस पर विभिन्‍न कार्यक्रमों का आयोजन,मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए संतुलित जीवन शैली अपनाएं : डॉ. सुदर्शन हरले।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र के मनोविज्ञान विभाग द्वारा विश्‍व मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य दिवस के उपलक्ष्‍य में जीवन के वास्‍तविक अनुभवों को सुना जाए : वास्‍तविक आवाज़े, वास्‍तविक बदलाव विषय पर मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य जागरूकता अभियान के तहत 09 अक्‍टूबर को कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्‍यक्षता में व्‍याख्‍यान का आयोजन किया गया। व्‍याख्‍यान में मुख्य वक्ता जिला सामान्‍य अस्‍पताल, वर्धा के मनोचिकित्‍सक डॉ. सुदर्शन हरले ने कहा कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए संतुलित जीवन शैली अपनाने की आवश्‍यकता है। तनाव के अलग-अलग प्रकार के कारण मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित समस्‍याएं किसी भी आयु में पैदा होती हैं। मानसिक रूप से टुट जाने के कारण भारत में 18 प्रतिशत से अधिक लोग इस बिमारी की चपेट में आते हैं। ऐसे लोगों से निरंतर संवाद किया जाना चाहिए और उनकी आवाज़े सुननी चाहिए। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य की समस्‍याएं परिवार में स्‍वस्‍थ संवाद से ही दूर की जा सकती हैं। आधुनिक जीवन शैली के कारण अवसाद की घटनाएं बढ़ रही हैं, ऐसे में तनाव का बटवारा करते हुए बोझ को कम किया जा सकता है। इस अवसर पर कस्‍तूरबा सभागार में निबंध प्रतियोगिता, पोस्‍टर प्रतियोगिता, मनोवैज्ञानिक परीक्षण का आयोजन किया गया। अतिथि का स्‍वागत कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने प्रतीक चिह्न, पुष्‍पगुच्‍छ एवं अंगवस्‍त्र देकर किया। कार्यक्रम का संचालन योग शिक्षक डॉ. राहुल जाटव ने किया तथा सहायक प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार त्रिपाठी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्‍ज्‍वलन, सरस्‍वती के चित्र पर माल्‍यार्पण एवं कुलगीत गायन से किया गया तथा समापन राष्‍ट्रीय गीत एवं राष्‍ट्रगान से किया गया।10 अक्‍टूबर को प्रात: 09:00 बजे से मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य जागरूकता रैली एवं 12 अक्‍टूबर को पूर्वाह्न 11:00 बजे प्रमाण-पत्र का वितरण किया जाएगा।इस अवसर पर परार्शदाता डॉ. स्‍मृति त्रिपाठी, डॉ. ज्‍योति सावळे, सहायक प्रोफेसर डॉ. ब्रिजेश यादव, डॉ. प्रेरणा आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया। इस अवसर पर अधिष्‍ठाता, विभागाध्‍यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्‍या में उपस्थित थे।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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