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कलेक्टर बिलासपुर में सूचना का अधिकार का क्या हाल है देख लीजिए?

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

कलेक्टर बिलासपुर कार्यालय द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता श्याममूरत कौशिक 16 सितम्बर 26 को जानकारी दी गई है कि आप के द्वारा चाही गई जानकारी इस कार्यालय में नहीं है। ये बहुत ही विचित्र बात है कि सरकारी रेस्ट हाऊस सर्किट हाउसो में रुकने विश्राम करने का शासन के नियम और आदेश की कॉपी जब कलेक्टर के पास नहीं है तो फिर किसके पास है? और जब इनके पास नियम की कॉपी ही नहीं है तो फिर ये किस आधार पर सरकारी रेस्ट हाऊसो को एलाट करते है? वही दूसरी तरफ बिलासपुर शहर के प्रोटोकॉल अधिकारी अर्थात एसडीएम बिलासपुर जो रेस्ट हाऊसो को एलाट करते है ने आरटीआई में ही ये जानकारी दी है कि 1जुलाई से 31 जुलाई तक बिलासपुर के रेस्ट हाऊसो में कौन कोन रुके थे? इस प्रकार के काल्पनिक प्रश्नों का उत्तर देने का आरटीआई अधिनियम में नियम नहीं है। 1जुलाई से 31 जुलाई तक रेस्ट हाऊसो को एलाट करने वाले प्रोटोकॉल अधिकारी एसडीएम बिलासपुर इसे काल्पनिक प्रश्न बता रहे है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आरटीआई अधिनियम का कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय में ही ये हाल है तो फिर बाकी सभी कार्यालयों में क्या हाल होगा?

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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