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जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में टेक ब्लिट्ज़ 2.0: गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और आईबीएम के पूर्व छात्र देंगे एआई-एमएल प्रशिक्षण

जबलपुर: जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज (JEC) की छात्र सोसायटी कॉसमॉस ‘टेक ब्लिट्ज़ 2.0’ का आयोजन कर रही है। दो सप्ताह तक चलने वाला यह ऑनलाइन कार्यक्रम कॉलेज के उन पूर्व छात्रों को जूनियर्स से जोड़ेगा, जो गूगल, इंटेल, माइक्रोसॉफ्ट और आईबीएम जैसी कंपनियों में काम कर रहे हैं। सत्रों में मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी के साथ इन तकनीकों के उद्योग में वास्तविक इस्तेमाल पर चर्चा होगी।

आयोजन में आईआईटी, एनआईटी, एमएनआईटी और डीएवीवी की छात्र सोसायटियों को भी जोड़ा गया है। आयोजकों के अनुसार इसका लाभ 10 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्रों को मिल सकता है।

कॉलेज और कॉसमॉस की पृष्ठभूमि

जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज मध्य प्रदेश का सबसे पुराना इंजीनियरिंग संस्थान है। इसकी स्थापना 7 जुलाई 1947 को गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। यह सरकारी संस्थान है और इलेक्ट्रॉनिक्स व दूरसंचार इंजीनियरिंग में देश के शुरुआती पाठ्यक्रमों में से एक शुरू करने वाला कॉलेज रहा है।

कॉसमॉस कॉलेज की साइंस और टेक्नोलॉजी स्टूडेंट कम्युनिटी है। यह साल भर वैज्ञानिक सोच और व्यावहारिक सीख से जुड़ी शैक्षणिक गतिविधियां चलाती है। कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ठाकुर (डॉ. जेएस ठाकुर) इस सोसायटी के मेंटर हैं। वे एसोसिएट प्रोफेसर हैं और आईआईआईटीडीएम जबलपुर से पीएचडी हैं।

पिछले संस्करण से आगे का कदम

कॉसमॉस सदस्य ध्रुव शुक्ला ने बताया कि यह आयोजन पहले भी हो चुका है, लेकिन इस बार इसे और व्यापक बनाया जा रहा है। कॉलेज की आधिकारिक गतिविधि रिपोर्ट के अनुसार TechBlitz 2025 का उद्घाटन 1 अगस्त 2025 को हुआ था। वह दो सप्ताह का तकनीकी कार्यशाला था, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन, इंटेल, एनवीडिया और टीसीएस समेत कंपनियों के JEC पूर्व छात्र शामिल हुए। विषयों में मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वीएलएसआई और प्रोडक्ट मैनेजमेंट शामिल थे। उस टीम में ध्रुव शुक्ला, आकाश शर्मा और धनश्री भी थे।

ध्रुव शुक्ला के अनुसार इस बार आईआईटी, एनआईटी, एमएनआईटी और डीएवीवी की सोसायटियों से बात हुई है और उनके छात्र भी जुड़ रहे हैं। कार्यक्रम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर होगा।

सिलेबस और उद्योग के बीच की दूरी

डॉ. जेएस ठाकुर ने कहा, “छात्रों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान सिलेबस से जुड़ी जानकारी दी जाती है और प्रैक्टिकल भी कराए जाते हैं, लेकिन सिलेबस में कई ऐसी चीजें नहीं होतीं जिनका इस्तेमाल आज फील्ड में हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि इंजीनियरिंग में नई जानकारी रोज आती है और उसे पाठ्यक्रम में तुरंत शामिल करना कठिन है। कॉलेज में छोटे प्रोजेक्ट होते हैं, जबकि उद्योग में बड़े पैमाने की वास्तविक समस्याएं हल की जाती हैं। “इसकी जानकारी वही लोग बेहतर दे सकते हैं जो उन समस्याओं का सामना कर रहे हैं।”

डॉ. ठाकुर के अनुसार कॉसमॉस के जरिए पूर्व छात्रों से संपर्क का सिलसिला इसलिए शुरू किया गया ताकि नवीनतम जानकारी जूनियर छात्रों तक पहुंचे। पूर्व छात्र इस काम के लिए तैयार हुए हैं।

शेड्यूल और विषय

कॉसमॉस सदस्य आकाश शर्मा ने बताया कि कई पूर्व छात्रों से बात करके शेड्यूल तैयार किया गया है। दो सप्ताह तक सीनियर इंजीनियर विभिन्न विषयों पर सत्र लेंगे। इनमें मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी प्रमुख हैं।

इंजीनियरिंग छात्रा धनश्री ने कहा, “कॉलेज में चीजों की जानकारी हो जाती है, लेकिन इस ज्ञान का इस्तेमाल कैसे करना है, यह फील्ड में काम करने वाला व्यक्ति बेहतर बता सकता है। सामान्य समझ और उस पर पकड़ बनाने का तरीका हमारे सीनियर सिखा सकते हैं। यह आयोजन उसी दिशा में है।”

क्या अपेक्षित है

कार्यक्रम का जोर कक्षा की थ्योरी को उद्योग की प्रैक्टिस से जोड़ने पर है। पिछले संस्करण में 500 से अधिक छात्रों की भागीदारी का उल्लेख कॉलेज गतिविधियों में रहा है। इस बार ऑनलाइन स्वरूप और अन्य संस्थानों की सोसायटियों के जुड़ाव से दायरा बड़ा करने की बात कही गई है।

अभी सार्वजनिक रूप से व्यक्तिगत वक्ता नाम, सटीक आरंभ तिथि या पंजीकरण लिंक स्वतंत्र रूप से जारी नहीं हुए हैं। विवरण आयोजकों के बयानों पर आधारित हैं। इच्छुक छात्र कॉसमॉस सोसायटी या कंप्यूटर साइंस विभाग से आधिकारिक शेड्यूल की पुष्टि कर सकते हैं।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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