मां की मौत के बाद 47 वर्षीय बेटी की नौकरी की मांग खारिज

हाईकोर्ट ने कहा-45वर्ष की उम्र सीमा से छूट का प्रावधान लागू नहीं
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 29अक्टूबर।मां की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग करने वाली47वर्षीय महिला को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि राज्य सरकार की14जून2013की नीति में अनुकंपा नियुक्ति के लिए अधिकतम उम्र सीमा45वर्ष तय है। इस सीमा से अधिक उम्र होने के कारण महिला का आवेदन खारिज करने में अधिकारियों ने कोई गलती नहीं की।
जगदलपुर निवासी शांति सेठिया की मां सरकारी काकतीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सहायक स्तर के पद पर कार्यरत थीं। उनकी मौत कैंसर के कारण हुई थी। इसके बाद शांति ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया,लेकिन विभाग ने अधिकतम उम्र सीमा पार होने के आधार पर उसे खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि परिवार में कमाने वाला कोई दूसरा सदस्य नहीं है और वह मृत कर्मचारी की इकलौती बेटी है। परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसके मामले में विशेष रियायत दी जानी चाहिए।
महिला के वकील ने22नवंबर2007के एक सर्कुलर का हवाला देते हुए अधिकतम उम्र सीमा में छूट देने की मांग की। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि14जून2013की नीति के क्लॉज11के तहत बेटी जैसे आवेदकों के लिए अधिकतम उम्र सीमा45वर्ष है। शांति की उम्र इससे अधिक होने के कारण आवेदन नियमों के अनुसार खारिज किया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि22नवंबर2007के सर्कुलर में मृत कर्मचारी की पत्नी को अधिकतम उम्र सीमा से छूट देने का प्रावधान है। लेकिन याचिकाकर्ता मृत कर्मचारी की बेटी है,इसलिए वह इस छूट का लाभ नहीं ले सकती। कोर्ट ने माना कि नीति में उम्र सीमा स्पष्ट है और आवेदन खारिज करने की प्रक्रिया अवैध नहीं है।



