आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर हाईकोर्ट ने मांगा जिलेवार ब्योरा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर अमल की स्थिति बताने शपथपत्र पेश करने का आदेश
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 4 नवंबर। आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और डॉग बाइट की घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर छत्तीसगढ़ सरकार को अब अपनी कार्रवाई का पूरा हिसाब देना होगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि कुत्तों की नसबंदी, एंटी रेबीज टीकाकरण और आम लोगों की सुरक्षा के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और उनका कितना असर हुआ है।
मंगलवार को चीफ जस्टिस केआर महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन की स्थिति बताते हुए शपथपत्र पेश करने को कहा है। इसमें जिलेवार जानकारी देनी होगी कि कितने कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हुआ, कितने एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर और शेल्टर चालू हैं तथा अस्पतालों और स्कूल-कॉलेजों के आसपास सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई 2026 को स्वतः संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर शपथपत्र देने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट को अपने-अपने राज्यों में इन निर्देशों के पालन की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले बताया था कि नसबंदी केंद्र, डॉग शेल्टर, निर्धारित फीडिंग जोन, पेट्रोलिंग टीम, हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान शुरू किए गए हैं। अब कोर्ट जानना चाहता है कि इन योजनाओं का जमीन पर कितना अमल हुआ और हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों का कितनी तेजी से निपटारा किया गया। अगली सुनवाई दिसंबर में होगी। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास उपस्थित थे।



