बिजली हादसों पर हाईकोर्ट ने पूछा- लापरवाही करने वाले अफसरों पर कार्रवाई का प्रावधान कहां?

एसओपी में जवाबदेही तय करने की व्यवस्था नहीं होने पर कोर्ट ने जताई चिंता, तीन सप्ताह में मांगा हलफनामा
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 4 नवंबर। बिजली वितरण व्यवस्था में लापरवाही और हादसों की रोकथाम को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिजली कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया 21 अगस्त 2026 को जारी सुरक्षा संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) में उन अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने का प्रावधान नजर नहीं आता, जो रखरखाव या सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही करते हैं।
चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि एसओपी लागू नहीं करने या जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की व्यवस्था क्यों नहीं है और इसे सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
कोर्ट ने कंपनी के सक्षम अधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है। शपथपत्र की एक प्रति राज्य सरकार के वकील को भी उपलब्ध करानी होगी।



