फिर विवादों में शिवाय हॉस्पिटल, ऑपरेशन के तीन महीने बाद महिला के घाव से निकल रहा मवाद; सीटी स्कैन में 80 सीसी पस जमा होने का दावा
कोरबा,06 नवम्बर 2026। कोरबा का शिवाय हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में है। अस्पताल से जुड़े पुराने विवादों के बाद अब एक महिला के ऑपरेशन के करीब तीन महीने बाद संक्रमण की शिकायत ने अस्पताल की उपचार व्यवस्था और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला के पति विकास कुमार अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी सोनम अग्रवाल की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद ऑपरेशन वाली जगह पर संक्रमण फैल गया और घाव से लगातार मवाद निकलने लगा। शिकायतकर्ता के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को कराए गए सीटी स्कैन में प्रभावित हिस्से में करीब 80 सीसी मवाद जमा होने की बात सामने आई है। उन्होंने जिला प्रशासन, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और पुलिस अधीक्षक को शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है।
विकास अग्रवाल के अनुसार, उनकी पत्नी का करीब तीन महीने पहले शिवाय हॉस्पिटल में बच्चेदानी एवं फैलोपियन ट्यूब से संबंधित समस्या को लेकर ऑपरेशन किया गया था। सर्जरी के कुछ समय बाद ही टांके वाली जगह पर सूजन आने लगी और वहां से मवाद निकलने लगा। परिजनों का कहना है कि उन्होंने चिकित्सक से संपर्क कर उपचार कराया और दवाइयां भी लीं, लेकिन महिला को अपेक्षित राहत नहीं मिली। स्थिति बिगड़ने पर सीटी स्कैन कराया गया। शिकायत में दी गई जानकारी के मुताबिक, रिपोर्ट में संक्रमण प्रभावित हिस्से का आकार 6.2 × 5.2 × 5 सेंटीमीटर बताया गया है। परिजनों का आरोप है कि संक्रमण पेट की दीवार की त्वचा के नीचे से मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों तक फैल गया था।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, सीटी स्कैन रिपोर्ट दिखाने के बाद ऑपरेशन के पुराने घाव वाली जगह पर दोबारा चीरा लगाकर उसे खोला गया और ड्रेसिंग शुरू की गई। इसके बावजूद महिला की परेशानी कम नहीं हुई। परिवार का दावा है कि शरीर के दूसरे हिस्से में भी मवाद जमा होने की समस्या सामने आई, जिसके बाद वहां भी चीरा लगाकर उपचार करना पड़ा। अब परिजन यह जानना चाहते हैं कि ऑपरेशन के बाद संक्रमण की स्थिति कैसे उत्पन्न हुई और समय रहते इसकी पहचान एवं उपचार के लिए क्या कदम उठाए गए।
इस मामले में कल्चर एवं सेंसिटिविटी जांच के लिए मवाद का सैंपल भेजे जाने को लेकर भी विवाद सामने आया है। विकास अग्रवाल का आरोप है कि उन्होंने चिकित्सक से कई बार सैंपल लेकर जांच कराने का आग्रह किया था। उन्हें सैंपल संबंधित लैब भेजे जाने की जानकारी दी गई, लेकिन अगले दिन लैब से संपर्क करने पर कथित तौर पर सोनम अग्रवाल के नाम से कोई सैंपल प्राप्त होने का रिकॉर्ड नहीं मिला। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस संबंध में उनके पास लैब से हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी है। हालांकि, सैंपल वास्तव में भेजा गया था या नहीं और जांच की प्रक्रिया क्या रही, इसकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस संबंध में डॉक्टर हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक के संचालक एवं पैथोलॉजिस्ट डॉ. अजय स्वर्णकार से भी जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उनसे संबंधित रिपोर्ट पर हस्ताक्षर और उसकी प्रमाणिकता को लेकर सवाल पूछे गए। उन्होंने मामला विचाराधीन होने की बात कहते हुए इस संबंध में कोई स्पष्ट टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
वहीं, अस्पताल का पक्ष जानने के लिए मीडिया प्रमुख जतिन डुडेजा से संपर्क किया गया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को निर्दोष बताते हुए कहा कि इस संबंध में विस्तृत बातचीत बाद में की जाएगी। फिलहाल उपचार प्रक्रिया, संक्रमण और कथित कल्चर जांच के सैंपल को लेकर अस्पताल की ओर से विस्तृत आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। CMHO डॉ. एस.एन. केशरी से भी फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी शामिल किया जाना अपेक्षित है।
गौरतलब है कि शिवाय हॉस्पिटल को लेकर इससे पहले भी विभिन्न शिकायतें और आरोप सामने आते रहे हैं। अस्पताल के पंजीयन एवं नर्सिंग होम एक्ट के नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए थे। पूर्व में अस्पताल के फ्रीजर में शव रखे होने के बावजूद उसके चालू नहीं रहने का आरोप भी चर्चा में रहा था। इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के तहत उपचार के बाद मरीजों से कथित रूप से अतिरिक्त राशि लेने की शिकायतें भी सामने आई थीं। हालांकि, इन पुराने आरोपों की आधिकारिक जांच और कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
विकास अग्रवाल ने प्रशासन से वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ और जनरल सर्जन को शामिल करते हुए स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है। साथ ही ऑपरेशन नोट्स, डिस्चार्ज समरी, दवाइयों का विवरण, जांच रिपोर्ट, अस्पताल के रजिस्टर, लैब में सैंपल जमा होने के रिकॉर्ड और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का आग्रह किया है। उन्होंने अस्पताल के पंजीयन, लैब के लाइसेंस और जांच प्रक्रिया की भी समीक्षा करने की मांग की है।
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल महिला के स्वास्थ्य, संक्रमण के कारण और कल्चर जांच के सैंपल की वास्तविक स्थिति को लेकर हैं। अब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।


