फारूक अब्दुल्ला ने एसआईआर पर सीईसी के कथित एकतरफा फैसलों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का स्वागत किया

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के उस नोटिस का स्वागत किया है, जो मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े फैसलों पर जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि शीर्ष अदालत ने मामले का संज्ञान लिया है। यह टिप्पणी उन्होंने पार्टी की बैठक के बाद श्रीनगर में मुख्यालय के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान की।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ने दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना फैसले लिए। मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लिया। हमें उम्मीद है कि अदालत मामले को देखेगी और गलतियों को सुधारेगी।” यह बयान उन याचिकाओं के संदर्भ में है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर से जुड़े कई फैसले चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की सहमति के बिना लिए।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना शामिल थे, ने सोमवार को केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, दोनों चुनाव आयुक्तों और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने सीईसी को निलंबित करने की अंतरिम मांग खारिज कर दी और कहा कि केवल अखबार की रिपोर्ट के आधार पर ऐसा आदेश नहीं दिया जा सकता। पीठ ने कहा कि वह सभी फैसलों की जांच करेगी और जो फैसला कानून के अनुरूप नहीं होगा, उसे रद्द किया जा सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किसी संशोधन को उसने मंजूरी नहीं दी है।
संगठन की बैठक और नए संविधान पर बात
फारूक अब्दुल्ला ने बताया कि बैठक संगठन को मजबूत करने और उन कमियों की पहचान करने के लिए बुलाई गई थी, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि श्रीनगर के आठ विधायकों, वार्ड अध्यक्षों और पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ इन मुद्दों पर बातचीत हुई। पार्टी के नए संविधान के बारे में उन्होंने कहा कि आवश्यक आंतरिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे जनता के सामने रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “सबसे पहले हम इसे अपनी कार्यसमिति के सामने रखेंगे। मंजूरी के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।”
इससे पहले रविवार, 4 अक्टूबर को फारूक अब्दुल्ला ने सीईसी ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद पर कहा था कि सबसे बड़ी गलती जवाहरलाल नेहरू के प्रशासन ने की थी और चुनाव आयोग को पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहिए था। उनके अनुसार, अगर आयोग स्वायत्त होता तो आज ऐसी स्थिति नहीं होती। जम्मू-कश्मीर में बढ़ती राजनीतिक गतिविधि के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस का ध्यान संगठन को मजबूत करने और चुनाव आयोग से जुड़े कानूनी मामले पर है।



