छत्तीसगढ़

बिलासपुर में रील बनाने पर एफआईआर, युवाओं ने कहा- पक्ष सुने बिना बना दिया अपराधी

सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला ने कहा- चेतावनी और काउंसलिंग से सुलझ सकता था मामला

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 11 अक्टूबर। सोशल मीडिया पर एक रील बनाने के मामले में नौ युवक-युवतियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर शनिवार को रील में शामिल युवक-युवतियों ने सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला और अन्य लोगों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बात सुने बिना पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की और उन्हें अपराधियों की तरह पेश किया गया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक (एसपी) और पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से एफआईआर पर पुनर्विचार कर उसे निरस्त करने की मांग की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में देवव्रत देवांगन ने बताया कि वह छात्र हैं और उन्होंने अभिनय के उद्देश्य से वीडियो बनाया था। उनके मुताबिक, पुरुषों ने कुर्ता-पायजामा और महिलाओं ने सामान्य दो-पीस पोशाक पहनी थी। यह पारंपरिक गरबा पोशाक नहीं थी। वीडियो में न तो गरबा नृत्य था और न ही किसी धार्मिक स्थल पर इसकी शूटिंग की गई थी। इसमें धार्मिक गीत का इस्तेमाल भी नहीं हुआ था।

देव ने बताया कि रील बनाने का उद्देश्य मनोरंजन के साथ एक सैलून का प्रचार करना था। इसके लिए दीपिका पादुकोण की एक फिल्म और दूसरी रीलों से प्रेरणा ली गई थी। वीडियो को लेकर धार्मिक भावनाएं आहत करने की शिकायत के बाद पांच युवतियों, जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है, और चार युवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

रील बनाने वाली शिफा शर्मा उर्फ शिफा मैथ्यू ने कहा कि किसी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना उनका उद्देश्य नहीं था। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वे फिल्मों के दृश्यों को दोबारा फिल्माते रहे हैं। इस रील का विचार भी धुरंधर और रासलीला जैसी फिल्मों तथा दूसरी रीलों से आया था।

शिफा के मुताबिक, वीडियो में इस्तेमाल की गई बंदूक खिलौना थी और सिगरेट भी असली नहीं थी। पोस्ट में इस संबंध में डिस्क्लेमर भी दिया गया था। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने भी यह बात रखी गई, लेकिन उनकी सफाई नहीं सुनी गई। यदि उन्हें पहले समझाया जाता तो वे वीडियो हटाने और जरूरत पड़ने पर माफी मांगने के लिए तैयार थे।

उन्होंने कहा कि घटना के बाद से समूह के युवक-युवतियां डरे हुए हैं। सोशल मीडिया पर मिल रही टिप्पणियों का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है। शिफा ने यह भी बताया कि वह 18 वर्षों से हिंदू परिवार की बहू हैं और दस्तावेजों में उनका नाम शिफा स्वाति शर्मा है। उनके अनुसार, रील में शामिल अन्य लोग भी हिंदू हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे सभी माफी मांगते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रियंका शुक्ला ने कहा कि नशे या हथियारों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना उचित नहीं है, लेकिन ऐसी सामाजिक समस्याओं का समाधान सीधे गिरफ्तारी और कठोर कानूनी कार्रवाई से नहीं किया जा सकता। यदि वीडियो की सामग्री अनुचित थी तो संबंधित युवाओं को चेतावनी देकर या काउंसलिंग के माध्यम से भी समझाया जा सकता था।

उन्होंने सवाल उठाया कि खिलौना बंदूकों का इस्तेमाल आपत्तिजनक माना जा रहा है। उन्होंने फिल्मों और वेब सीरीज का उदाहरण देते हुए पूछा कि जब युवा उनसे प्रभावित होकर दृश्य दोहराते हैं तो क्या ऐसी सामग्री बनाने वालों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी।

अधिवक्ता और अभिनेता अजय शर्मा ने संबंधित परिवारों के साथ पुलिस थाने में शिकायतकर्ताओं के व्यवहार पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक, शिकायत करने वाले कुछ लोगों ने थाने में युवक-युवतियों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। थाने में ही गाली-गलौज किए जाने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल लोगों ने यह भी कहा कि संबंधित युवक-युवतियों को दोपहर से आधी रात तक थाने में रखा गया था।

प्रियंका शुक्ला ने एसपी और आईजी से मामले की समीक्षा कर एफआईआर निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संबंधित युवक-युवतियां सामान्य परिवारों से आते हैं और उन्हें अपराधियों की तरह पेश नहीं किया जाना चाहिए।

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