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23 सितंबर से अटका स्वास्थ्य कर्मियों का अनटाइड फंड! राशि नहीं मिलने से नाराजगी, सोमवार तक भुगतान का इंतजार, फिर आंदोलन की तैयारी।

विकास नंद/ सर्वव्यापी

स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाओं के विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) एवं कायाकल्प जैसी योजनाओं के तहत लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों के बीच अनटाइड फंड की राशि जमा नहीं होने की शिकायतों को लेकर नाराजगी सामने आ रही है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित राशि को लेकर 23 सितंबर 2026 से भुगतान लंबित होने की बात कही जा रही है। इससे स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक कार्यों के संचालन और निर्धारित गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

व्हाट्सएप ग्रुप में छलका कर्मचारियों का आक्रोश

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े NQAS कर्मचारियों के बीच अनटाइड फंड की राशि नहीं मिलने का मुद्दा चर्चा में है। व्हाट्सएप ग्रुप में साझा संदेशों के अनुसार, सरायपाली सहित आसपास के कुछ क्षेत्रों के कर्मचारियों ने राशि प्राप्त नहीं होने की शिकायत की है। सरायपाली और बिलाईगढ़ क्षेत्र से जुड़े सदस्यों ने भी इस संबंध में अपनी बात रखी है।ग्रुप में एक सदस्य ने नाराजगी जताते हुए सवाल उठाया कि जब अनटाइड फंड के ₹25 हजार तक की राशि समय पर जमा नहीं हो पा रही है, तो निर्धारित कार्यों को कैसे पूरा किया जाएगा? वहीं, एक अन्य सदस्य ने प्लस पोलियो अभियान से संबंधित राशि जमा नहीं होने की बात भी कही है।कर्मचारियों की ओर से उठाए गए इन सवालों ने स्वास्थ्य विभाग की भुगतान व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, राशि किन स्वास्थ्य संस्थानों की लंबित है और देरी के पीछे क्या कारण हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

सोमवार तक इंतजार, मंगलवार को बीएमओ कार्यालय के घेराव की चेतावनी!

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कर्मचारियों के बीच यह चर्चा है कि यदि सोमवार तक संबंधित राशि जमा नहीं होती है, तो मंगलवार को संघ की ओर से बीएमओ कार्यालय का घेराव किया जा सकता है। हालांकि, आंदोलन की अंतिम रणनीति और घेराव के निर्णय की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।यदि भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपनाते हैं, तो स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों के सामने इस मामले को स्पष्ट करने की चुनौती होगी। फिलहाल, सभी की निगाहें सोमवार तक होने वाली संभावित भुगतान प्रक्रिया और विभागीय पहल पर टिकी हैं।

सवालों के घेरे में भुगतान व्यवस्था, जरूरी काम कैसे होंगे?

स्वास्थ्य संस्थानों को उपलब्ध कराया जाने वाला अनटाइड फंड निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत स्थानीय आवश्यकताओं और स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित कार्यों में उपयोग किया जाता है। ऐसे में राशि के भुगतान या हस्तांतरण में देरी की शिकायतें सामने आने पर यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों को राशि कब तक उपलब्ध कराई जाएगी।यदि राशि की अनुपलब्धता के कारण जरूरी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो इसका असर स्वास्थ्य संस्थानों के कामकाज पर पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाएं बाधित होने की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

मुख्य सवाल यही हैं—राशि लंबित होने की वास्तविक वजह क्या है? भुगतान की जिम्मेदारी किस स्तर पर है? अनटाइड फंड और प्लस पोलियो की राशि कब तक जमा होगी? इन सवालों पर संबंधित अधिकारियों का स्पष्टीकरण जरूरी है।

100 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों के प्रमाणीकरण के बीच भुगतान में देरी की शिकायत

महासमुंद जिले में NQAS के तहत 100 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों के राष्ट्रीय प्रमाणीकरण की उपलब्धि से जुड़ी खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन और गुणवत्ता सुधार से संबंधित गतिविधियों के लिए निर्धारित राशि को लेकर शिकायतें सामने आना विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए केवल संस्थानों का प्रमाणीकरण ही नहीं, बल्कि आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता और योजनाओं का सुचारु संचालन भी महत्वपूर्ण है। इसलिए संबंधित राशि की स्थिति स्पष्ट कर कर्मचारियों की शिकायतों का निराकरण किया जाना चाहिए।

अब विभागीय जवाब का इंतजार

फिलहाल, यह मामला स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा साझा की गई जानकारी और शिकायतों पर आधारित है। अनटाइड फंड एवं प्लस पोलियो से संबंधित राशि वास्तव में किन संस्थानों की लंबित है, भुगतान में देरी क्यों हुई है और राशि जारी करने की समय-सीमा क्या है, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।अब देखना होगा कि सोमवार तक भुगतान को लेकर क्या पहल होती है और क्या कर्मचारियों को राहत मिलती है, या फिर मंगलवार को बीएमओ कार्यालय के घेराव की स्थिति बनती है। मामले में संबंधित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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