जींद सिविल अस्पताल: नसबंदी ऑपरेशन के दौरान महिला से कथित छेड़छाड़, ओटीए को उचाना भेजा; जांच समिति गठित

जींद के जिला सिविल अस्पताल में सोमवार शाम नसबंदी का ऑपरेशन कराने आई एक महिला के साथ ऑपरेशन थिएटर सहायक (ओटीए) द्वारा कथित छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी कर्मचारी को ड्यूटी से हटाकर उचाना भेज दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को आठ सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति को दो दिन में रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
घटना का क्रम
सोमवार को महिला नसबंदी ऑपरेशन के लिए जिला नागरिक अस्पताल पहुंची थी। शाम करीब पांच बजे उसे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया। आरोप है कि इसी दौरान ओटी में तैनात ओटीए ने महिला के साथ अनुचित व्यवहार और छेड़छाड़ की कोशिश की। महिला ने विरोध किया, जिसके बाद ओटी में हंगामा हो गया। परिजन मौके पर पहुंचे और सीएमओ कार्यालय में शिकायत की।
सूचना मिलते ही अस्पताल के विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुमन कोहली ने पीड़िता और संबंधित कर्मचारी से बात की तथा उच्च अधिकारियों को जानकारी दी।
डीसी का निरीक्षण, पुलिस में अभी शिकायत दर्ज नहीं
घटना की जानकारी मिलते ही जिला उपायुक्त डॉ. वैशाली शर्मा अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने सीधे ऑपरेशन थिएटर जाकर अधिकारियों से घटनाक्रम की जानकारी ली। डीसी ने मामले को गोपनीय बताया और फिलहाल विस्तृत टिप्पणी से इनकार किया।
सिविल लाइन थाना प्रभारी आशीष कुमार ने कहा कि पुलिस को अभी तक इस संबंध में कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कर्मचारी का स्थानांतरण और जांच समिति
स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी ओटीए को तुरंत ड्यूटी से हटाकर उचाना स्थानांतरित कर दिया है। मंगलवार को प्रधान चिकित्सा अधिकारी की ओर से आठ सदस्यीय समिति गठित की गई। सिविल सर्जन कार्यालय के आदेश के अनुसार समिति को शिकायत की जांच कर दो दिन के अंदर प्रधान चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में रिपोर्ट जमा करनी है।
सीएमओ का बयान
सीएमओ डॉ. सुमन कोहली ने कहा कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाली महिला मरीजों की सुरक्षा और सम्मान से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। समिति पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। इसमें महिला और परिजनों के आरोपों समेत मामले से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जाएगा।
मामला विभागीय जांच के अधीन है। पुलिस शिकायत दर्ज होने के बाद ही आपराधिक कार्रवाई का निर्धारण होगा।



