अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने खेतों में पहुंचकर देखी फसलें, किसानों से किया संवाद।
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर जिले के किसान अब परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण की दिशा में नए प्रयोग कर रहे हैं। कहीं धान के स्थान पर रागी, कोदो-कुटकी की फसल लहलहा रही है, तो कहीं गेंदे के फूलों और सब्जियों की खेती किसानों के लिए आमदनी के नए अवसर खोल रही है। अपर मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा जिले के प्रभारी सचिव मनोज पिंगुआ ने आज जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर किसानों द्वारा अपनाई जा रही इन नई कृषि पद्धतियों का अवलोकन किया। उन्होंने खेतों में पहुंचकर किसानों से खेती की लागत, उत्पादन, फसल तैयार होने की अवधि और आमदनी के संबंध में विस्तार से चर्चा की। इस दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल, सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल, उप संचालक कृषि सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे। कोटा ब्लॉक के ग्राम भेलवा टिकरा में डॉ. पल्लवी गिरी ने धान की परंपरागत खेती से हटकर नई पहल की है। उन्होंने पहली बार धान के स्थान पर एक-एक हेक्टेयर में रागी, कोदो और कुटकी की फसल लगाई है। अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने उनके खेत में पहुंचकर फसलों का अवलोकन किया और इस नवाचार में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने वहां मौजूद किसान से फसल तैयार होने की अवधि, बीज की उपलब्धता और खेती में आने वाली लागत के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि रागी, कोदो-कुटकी जैसी लघु धान्य फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने से किसानों को फसल विविधीकरण के बेहतर अवसर मिलेंगे। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को अन्य किसानों को भी ऐसी वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। इसके बाद अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने कोटा विकासखंड के ग्राम सिलदहा में किसान संतोष शुक्ला के खेत में पहुचंकर गेंदे की खेती का अवलोकन किया। खेतों में खिले गेंदे के फूलों के बीच उन्होंने किसान से उत्पादन, लागत और बाजार में मिलने वाले मूल्य के संबंध में चर्चा की। वहां मौजदू किसान ने बताया कि लगभग सवा एकड़ में गेंदे की खेती की जा रही है। लगभग 8 से 10 टन गेंदे का उत्पादन होता है। पिंगुआ ने फूलों की खेती से किसानों को होने वाले आर्थिक लाभ की जानकारी ली और उद्यानिकी फसलों के विस्तार पर जोर दिया। निरीक्षण के दौरान ग्राम सिलदहा में किसानों द्वारा अपनाई जा रही अंतरवर्तीय खेती भी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। यहां संतोष शुक्ला अपने खेत में एक-एक हेक्टेयर में खीरे के साथ आलू, टमाटर के साथ बीन्स तथा बैंगन के साथ पत्तागोभी की खेती कर रहे हैं। इसके अलावा करेले सहित अन्य सब्जियों का भी उत्पादन किया जा रहा है। किसान ने बताया कि इससे उन्हें प्रति एकड़ लगभग 2 से 3 लाख रुपए तक का लाभ प्राप्त हो रहा है। अंतरवर्तीय खेती से किसान उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग कर एक साथ विभिन्न फसलों का उत्पादन कर रहे हैं। अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए परंपरागत खेती के साथ फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। कोदो-कुटकी, फूलों और सब्जियों जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती किसानों के लिए आय के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है। उन्होंने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों को किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में इस तरह के नवाचारों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान लाभकारी खेती अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकें।



