एनएमसी डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा के मुद्दे की जांच करे : न्यायालय

नयी दिल्ली, 4 नवंबर। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) को निर्देश दिया कि वह डॉक्टरों के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद अनिवार्य ग्रामीण सेवा के मुद्दे पर विचार करे।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसमें डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा का मुद्दा उठाया गया था।
पीठ ने कहा, हम राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) को निर्देश देते हैं कि वह एमबीबीएस पाठ्यक्रम पूरा करने वाले डॉक्टरों के लिए अनिवार्य ग्रामीण सेवा के मुद्दे की जांच करे।
इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख आठ दिसंबर तय की गयी है।
मई 2024 में, शीर्ष अदालत ने कर्नाटक के एक डीम्ड विश्वविद्यालय में निजी सीटों से स्नातक हो रहे कुछ एमबीबीएस छात्रों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति जताई थी।
याचिकाकर्ताओं ने कर्नाटक सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सेवा आयुक्तालय से यह निर्देश देने की मांग की है कि उन्हें अनिवार्य ग्रामीण सेवा के संबंध में शपथ-पत्र देने के लिए मजबूर किए बिना, आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी किया जाए।(भाषा)



