रक्षा मंत्री ने कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में कहा, एक साल में यह नौसेना के इतिहास की सबसे बड़ी बढ़ोतरी होगी

नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि वर्ष 2026 भारतीय नौसेना के लिए ऐतिहासिक वर्ष है। इस साल नौसेना में 18 युद्धपोतों को शामिल करने या कमीशन करने की योजना है। उन्होंने इसे नौसेना के इतिहास में एक वर्ष में सबसे बड़ी सैन्य क्षमता वृद्धि बताया।
राजनाथ सिंह नई दिल्ली स्थित नौसेना भवन में भारतीय नौसेना के द्विवार्षिक कमांडर्स सम्मेलन 2026 के दूसरे संस्करण को संबोधित कर रहे थे। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चल रहा है। इसमें नौसेना के वरिष्ठ कमांडर परिचालन तैयारियों, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की क्षमताओं की समीक्षा कर रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि हाल में कमीशन किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। भारतीय नौसेना का युद्धपोत निर्माण तंत्र अब वैश्विक मानकों पर खरा उतर रहा है। उन्होंने कहा कि अब देश को अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ मित्र देशों को युद्धपोत निर्यात करने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना की ब्लू वाटर क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय युद्धपोत अब दक्षिण चीन सागर, भूमध्य सागर और अटलांटिक महासागर तक मौजूद हैं। यह नौसेना की बढ़ती वैश्विक पहुंच को दर्शाता है।
उन्होंने भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में प्रथम रिस्पॉnder, पसंदीदा सुरक्षा साझेदार और विश्वास का प्रतीक बताया। रक्षा मंत्री के अनुसार समुद्री क्षेत्र में भीड़भाड़, धोखाधड़ी और ग्रे-जोन गतिविधियां बढ़ी हैं, इसलिए निगरानी और प्रतिक्रिया तंत्र को और ऊंचा उठाना जरूरी है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि समुद्र सुरक्षित रहेंगे तो भारत सुरक्षित रहेगा। भारत सुरक्षित रहेगा तो विकसित भारत का संकल्प और मजबूत होगा। उन्होंने नौसेना से कहा कि तैयारी संकट के दरवाजे तक पहुंचने से पहले ही संकट बिंदु तक पहुंच जानी चाहिए।
सम्मेलन में रक्षा मंत्री ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और थलसेना प्रमुख से भी मुलाकात की। उन्होंने नौसेना की परिचालन क्षमता, आत्मनिर्भरता और भविष्य की तैयारियों की सराहना की।



