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INDIA ब्लॉक की दिल्ली बैठक से पहले सेंट्रल दिल्ली में लगे पोस्टर, विपक्ष पर ECI-EVM को लेकर दोहरे रवैये का आरोप

नई दिल्ली। INDIA ब्लॉक की अहम बैठक से पहले बुधवार को राजधानी के सेंट्रल दिल्ली इलाकों में कई पोस्टर और होर्डिंग लगे दिखे। इन पोस्टरों में विपक्षी नेताओं पर चुनाव आयोग (ECI), EVM और चुनावी प्रक्रिया को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया है। पोस्टरों का मूल संदेश यह है कि चुनाव आयोग पर भरोसा नतीजों के साथ बदलता है या नहीं। हालांकि, इन बैनरों को किसने लगवाया है, यह स्पष्ट नहीं है। इनमें लिखे आरोप पोस्टर लगाने वालों के दावे हैं।

बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सुबह शुरू हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, जयराम रमेश, के. सी. वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी समेत सपा, राजद, एनसीपी (एसपी), शिवसेना (यूबीटी), सीपीआई, सीपीआई(एम) और अन्य दलों के नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में राज्यसभा नामांकन प्रक्रिया में व्यस्त होने के कारण बैठक में नहीं आए और पार्टी के प्रतिनिधियों को भेजा। उद्धव ठाकरे वर्चुअल रूप से जुड़े। डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक से दूरी बनाए रखी।

बैठक का एजेंडा मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की भूमिका, EVM-VVPAT और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें हटाने के प्रस्ताव पर संयुक्त रणनीति तय करना है। सूत्रों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा में CEC को हटाने का ड्राफ्ट नोटिस तैयार है और इस पर चर्चा होनी थी। कांग्रेस कार्य समिति ने एक दिन पहले देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया था। पार्टी ने SIR पर रोक, मतदाता सूची से हटाए गए नामों की बहाली और CEC के इस्तीफे की मांग की है।

पोस्टरों में राहुल गांधी के बिहार चुनाव प्रचार से जुड़े आरोप, अखिलेश यादव के पुराने बयान और 2024-25 के चुनावी रुख को जोड़कर नैरेटिव बनाने की कोशिश दिखी। एक पोस्टर में यह लिखा गया कि जीत पर चुनाव आयोग की तारीफ और हार पर वोट चोरी का आरोप लगाया जाता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। चुनाव आयोग ने SIR संबंधी फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और आलोचना का खंडन किया है।

इस तरह बैठक से ठीक पहले दिल्ली की सड़कों पर चुनावी प्रक्रिया, SIR और चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष संयुक्त आंदोलन की रूपरेखा तय करने में जुटा है, जबकि सड़क पर लगे अनाम पोस्टर उसी बहस को पलटकर विपक्ष के रुख पर सवाल उठा रहे हैं।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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