विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को न फीस वापस मिलेगी, न पुराना स्टाइपेंड

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 3नवंबर।विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स),बिलासपुर में इंटर्नशिप करने वाले डॉक्टरों को हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने इंटर्नशिप के दौरान जमा की गई एक लाख रुपये की फीस वापस करने और अगस्त2022से पहले की अवधि का स्टाइपेंड भारतीय मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के बराबर देने की मांग खारिज कर दी है। इस संबंध में दाखिल तीन अलग-अलग याचिकाओं को कोर्ट ने निरस्त कर दिया।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने18नवंबर2021से पहले विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल की थी। इसलिए वे बाद में लागू हुए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिएट रेगुलेशंस के आधार पर पुराने भुगतान की वापसी और पिछली अवधि का स्टाइपेंड मांगने के हकदार नहीं हैं।
इस मामले की मुख्य याचिका डॉ. श्यामू कुमार जांगड़े और13अन्य डॉक्टरों ने दाखिल की थी। इनमें बिलासपुर के डॉ. अरविंद कुमार लाकड़ा,डॉ. राहुल कुमार,मोनिया और सोनिया जायसवाल,अदिति गुप्ता,दिव्या चंद्रा,दीक्षा कौशिक,मनीषा चंद्रा,रितिका मसीह,रिचा,नवल चौधरी,कुशल किशोर पटेल और कान्हा श्रीवास शामिल थे। इनके अलावा डॉ. छत्रेश चौधरी और डॉ. प्रणव पांडेय ने भी अलग याचिकाएं दाखिल की थीं।
तीनों मामलों की एक साथ सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव और राज्य सरकार की ओर से पैनल अधिवक्ता आकांक्षा वर्मा ने पक्ष रखा।
डॉक्टरों का कहना था कि विदेश से मेडिकल डिग्री लेने के बाद सिम्स में इंटर्नशिप के लिए प्रत्येक को एक लाख रुपये फीस जमा करनी पड़ी थी। बाद में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने4मार्च2022को दिशा-निर्देश जारी किए और19मई2022को सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया कि18नवंबर2021से पहले डिग्री प्राप्त करने वाले विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट से इंटर्नशिप फीस नहीं ली जाएगी। उन्हें भारतीय मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के समान स्टाइपेंड और दूसरी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
इसके आधार पर चिकित्सा शिक्षा संचालनालय ने5अगस्त2022को आदेश जारी किया था। डॉक्टरों ने इसी आदेश का हवाला देते हुए पहले जमा की गई फीस वापस करने और इंटर्नशिप में रजिस्ट्रेशन की तारीख से स्टाइपेंड देने की मांग की थी। उनका कहना था कि अगस्त2022से स्टाइपेंड तो मिलने लगा,लेकिन उससे पहले की अवधि का भुगतान नहीं किया गया।
राज्य सरकार ने कोर्ट में बताया कि संबंधित डॉक्टरों ने वर्ष2015में ही इंटर्नशिप फीस जमा कर दी थी।24नवंबर2022को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया था कि4मार्च2022के एनएमसी सर्कुलर से पहले वसूली गई फीस वापस नहीं की जाएगी।
सरकार का तर्क था कि बाद में जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर पहले से जमा फीस की वापसी का दावा नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने पाया कि सभी याचिकाकर्ताओं ने18नवंबर2021से पहले विदेशी मेडिकल डिग्री हासिल की थी। इसलिए वे बाद में लागू नियमों के आधार पर पहले जमा की गई फीस वापस मांगने का अधिकार नहीं जता सकते। कोर्ट ने फीस वापसी पर राज्य सरकार के24नवंबर2022के फैसले को भी रिकॉर्ड पर लिया।
स्टाइपेंड के मामले में भी याचिकाकर्ता अगस्त2022से पहले की अवधि के भुगतान के लिए कोई ऐसा स्पष्ट नियम या आदेश पेश नहीं कर सके,जिसके आधार पर उनका दावा स्वीकार किया जा सके। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने तीनों याचिकाएं खारिज कर दीं।



