ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की चुनौती खारिज की, याचिकाएं कलकत्ता हाईकोर्ट में 25-26 नवंबर को सुनवाई के लिए बरकरार

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर केंद्र सरकार की चुनौती पर विचार करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि मामला पहले से कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है और वहीं उसकी सुनवाई होनी चाहिए।
पीठ ने केंद्र और अंडमान-निकोबार प्रशासन की उस याचिका को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट की 6 मई 2026 की व्यवस्था को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट की पोर्ट ब्लेयर सर्किट बेंच ने सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मीना गुप्ता की याचिकाओं की मेंटेनेबिलिटी पर केंद्र की आपत्ति खारिज कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा कि वह अन्य संबंधित मामलों में प्लीडिंग पूरी करे और पहले से तय तारीखों, 25 और 26 नवंबर 2026, पर सुनवाई का प्रयास करे।
केंद्र की दलील और अदालत का रुख
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता हैदराबाद की निवासी हैं और द्वीपों से उनका सीधा संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि एक ही मुद्दे पर कई मंचों पर सुनवाई हो रही है। पीठ ने स्पष्ट किया कि मेंटेनेबिलिटी का सवाल हाईकोर्ट पहले ही तय कर चुका है। न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि याचिका में निकोबार के आदिवासी निवासियों की स्थिति, उनके अधिकारों और परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय सवाल उठे हैं, जिनकी जांच हाईकोर्ट कर सकती है।
अदालत ने दोनों पक्षों के इस आश्वासन को भी दर्ज किया कि वे हाईकोर्ट की कार्यवाही में पूरा सहयोग देंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर परियोजना की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की।
याचिकाओं में क्या आरोप हैं
मीना गुप्ता की याचिकाओं में आरोप है कि ग्रेट निकोबार परियोजना के लिए सहमति लेते समय अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ। याचिकाओं में गालाथिया और कैंपबेल बे नेशनल पार्क के आसपास इको-सेंसिटिव बफर जोन कम करने से जुड़ी अधिसूचनाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ आदिवासी समूहों के सदस्यों ने भी इन कार्यवाहियों में पक्षकार बनने की मांग की है।
परियोजना में क्या शामिल है
ग्रेट निकोबार होलिस्टिक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 92,000 करोड़ रुपये बताई जाती है। इसमें गालाथिया बे में 14.2 मिलियन टीईयू क्षमता का अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, 4,000 पीक आवर पैसेंजर क्षमता का ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, 450 एमवीए गैस-सोलर पावर प्लांट और एक नियोजित टाउनशिप शामिल हैं। सरकार इसे रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताती है, जबकि पर्यावरण समूह और कुछ राजनीतिक दल कोरल कॉलोनियों, वन क्षेत्र और स्थानीय जनजातियों पर संभावित असर को लेकर विरोध जताते रहे हैं।
अब अगली सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में 25 और 26 नवंबर 2026 को होनी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट इन तारीखों पर वन अधिकार, आदिवासी हित और पर्यावरणीय मुद्दों पर दलीलें सुनेगा।



