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जंतर मंतर पर कुछ पुलिसकर्मियों के नेम टैग नहीं दिखे, सीपीआई सांसद ने अमित शाह को लिखा पत्र

नई दिल्ली: जंतर मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन के दौरान कुछ दिल्ली पुलिसकर्मियों के नेम टैग नजर नहीं आने से विवाद खड़ा हो गया है। सीपीआई के राज्यसभा सांसद पी. संदोष कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पुलिस पर बल प्रयोग, हिरासत और पहचान छिपाने के आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि नेम टैग न पहनने का कोई आदेश नहीं दिया गया।

प्रदर्शन चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहा है। 2 अक्टूबर के आसपास जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद तीन प्राथमिकी दर्ज कीं और अगले दिन भी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

पी. संदोष कुमार ने शनिवार को लिखे पत्र में कहा कि वे स्वयं शुक्रवार को अपने दल के कार्यकर्ताओं, सीपीआई(एम), सीपीआई(एमएल) लिबरेशन, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं, एआईएसएफ, एआईवाईएफ, एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएसए और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ हिरासत में लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस ने हिंसा, सामूहिक हिरासत, इंटरनेट बंद करने और धक्का-मुक्की से जवाब दिया।

सांसद ने लिखा कि कुछ पुलिसकर्मी हिरासत या बल प्रयोग से पहले पहचान टैग और नेम बैज हटा रहे थे या छिपा रहे थे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के डी. के. बासु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले के निर्देशों का हवाला दिया, जिनमें गिरफ्तारी या हिरासत संभालने वाले पुलिसकर्मियों के लिए स्पष्ट और दिखने वाला नाम व पदनाम अनिवार्य है। उन्होंने दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर नंबर 51 का भी जिक्र किया, जिसके तहत यूनिफॉर्म में द्विभाषी नेम प्लेट जरूरी है। उन्होंने बल प्रयोग, हिरासत, सादे कपड़ों में तैनाती और पहचान छिपाने की समयबद्ध जांच की मांग की।

मीडिया रिपोर्टों में अनाम अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि जुलाई में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को निशाना बनाए जाने के कारण कुछ जूनियर कर्मियों को नेम टैग के बिना तैनात रहने दिया गया। वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ज्यादातर टैग पहने रहे। वीडियो में कुछ कर्मियों ने कहा कि टैग भीड़ में टूट गए या गिर गए, कुछ ने भूल जाने की बात कही और कुछ ने जानबूझकर हटाने की बात स्वीकार की।

नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने एनडीटीवी को बताया कि नेम टैग न पहनने का पुलिस की ओर से कोई निर्देश नहीं है। भीड़ नियंत्रण के दौरान कुछ टैग टूट सकते हैं और कर्मियों को नेम टैग पहनना जरूरी है। स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार प्लेट काले बैकग्राउंड पर सफेद अक्षरों वाली होनी चाहिए। जुलाई के प्रदर्शन के बाद भी नेम टैग न दिखने का मुद्दा उठा था।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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