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बांग्लादेश सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मान की भूमिका: हसीना के प्रस्थान से भारत-विरोधी माहौल तक के दावे और उपलब्ध तथ्य

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने और उनके भारत आने के बाद भारत के खिलाफ जो राजनीतिक और सड़क-स्तर का माहौल बना, उसमें सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मान की भूमिका को लेकर आरोप और विपरीत आकलन दोनों सामने आए हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड और भारतीय तथा बांग्लादेशी रिपोर्टिंग के मुताबिक यह भूमिका एकतरफा “संदिग्ध” या साबित अपराध नहीं है। आरोप मुख्य रूप से हसीना खेमे के बयानों और एक पुस्तक पर आधारित हैं, जबकि कई अन्य रिपोर्टें उन्हें भारत-विरोधी कदमों का विरोध करने वाला अधिकारी बताती हैं।

जनरल वकार-उज़-ज़मान का जन्म 16 सितंबर 1966 को हुआ। 11 जून 2024 को शेख हसीना की सरकार ने उन्हें अगला सेना प्रमुख नियुक्त किया और उन्होंने 23 जून 2024 को पदभार संभाला। इससे पहले वे सशस्त्र बल प्रभाग में प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर रह चुके थे और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ नियमित समन्वय में काम करते थे। भारतीय मीडिया में उन्हें हसीना का दूर का रिश्तेदार बताया गया है। जून 2024 में उनकी नियुक्ति के समय यह धारणा थी कि वे सरकार के करीबी और पेशेवर अधिकारी हैं।

5 अगस्त 2024: इस्तीफे की घोषणा और सुरक्षित निकास

छात्र आंदोलन के दौरान 3 अगस्त 2024 को वकार ने अधिकारियों को संबोधित किया और कहा कि सेना फांसी या दमन की कार्रवाई में शामिल नहीं होगी। 4 अगस्त को सेनाध्यक्षों ने हसीना को इस्तीफे की सलाह दी। 5 अगस्त को सेना ने गणभवन पर स्थिति संभाली, हसीना के इस्तीफे की घोषणा की और उन्हें बांग्लादेश वायुसेना के अड्डे तक पहुंचाया, जहां से वे भारत चली गईं। वकार ने टेलीविजन पर कहा कि हसीना ने इस्तीफा दे दिया है और देश छोड़कर चली गई हैं, तथा राजनीतिक दलों और आंदोलनकारियों की सहमति से अंतरिम सरकार बनेगी। सेना हिंसा की जांच करेगी और सत्ता नागरिक व्यवस्था को सौंपेगी।

हसीना समर्थक इस घटनाक्रम को विश्वासघात मानते हैं। पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल ने पुस्तक Inshallah Bangladesh: The Story of an Unfinished Revolution (लेखक दीप हलदर, जयदीप मजूमदार और साहिदुल हसन खोकन) में दावा किया कि वकार ने हसीना से भीड़ को रोकने का भरोसा दिया था, लेकिन बाद में मुकर गए। कमाल ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता परिवर्तन एक “सीआईए साजिश” था और वकार “उनकी जेब में” थे। ये आरोप पुस्तक में उद्धृत बयान हैं। इन्हें किसी अदालत, आधिकारिक जांच या स्वतंत्र साक्ष्य से प्रमाणित नहीं किया गया है। बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों पर भी इसी पुस्तक में लापरवाही या मिलीभगत का आरोप है, जो अभी आरोप के स्तर पर है।

भारत-विरोधी माहौल और सेना प्रमुख के सार्वजनिक बयान

हसीना के भारत पहुंचने के बाद ढाका में भारत विरोधी नारे, सीमा मुद्दे, जल-बंटवारा और प्रत्यर्पण की मांग जोर पकड़ती रही। दिसंबर 2024 के छात्र रैली में कड़ी भारत-विरोधी भाषा सुनी गई। जनवरी 2025 में प्रोथोम आलो को दिए साक्षात्कार में जनरल वकार ने इस स्वर को नरम किया। उन्होंने भारत को “महत्वपूर्ण पड़ोसी” कहा और रिश्ते को “देने-लेने” वाला बताया। उनके शब्दों में बांग्लादेश भारत पर कई मोर्चों पर निर्भर है और भारत को भी बांग्लादेश की स्थिरता से लाभ है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश पड़ोसी के रणनीतिक हितों के खिलाफ कुछ नहीं करेगा, लेकिन अपेक्षा है कि भारत भी बांग्लादेश के हितों के खिलाफ कदम न उठाए। उन्होंने सीमा पर हत्याएं रोकने, पानी का उचित हिस्सा और चटगांव हिल ट्रैक्ट्स तथा म्यांमार सीमा पर स्थिरता की बात कही। चीन को उन्होंने विकास साझेदार बताया।

द हिंदू ने इस साक्षात्कार को छात्र रैली की भारत-विरोधी बयानबाजी को ठंडा करने वाला कदम बताया। स्वराज्य पत्रिका की मार्च 2025 की रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत ने वकार के खिलाफ कथित तख्तापलट की कोशिश नाकाम करने में मदद की। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान-समर्थक कुछ जनरलों उन्हें हटाना चाहते थे, क्योंकि वे पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के साथ घनिष्ठ सैन्य संबंधों तथा अंतरिम सरकार के कई भारत-विरोधी कदमों का विरोध कर रहे थे। रिपोर्ट ने उन्हें सेना को गैर-राजनीतिक रखने का पक्षधर और भारत के प्रति अपेक्षाकृत सकारात्मक झुकाव वाला अधिकारी बताया। यह रिपोर्ट भी खुफिया सूत्रों पर आधारित दावा है, आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं मिली।

विरोधी कथानक और बाद के घटनाक्रम

हसीना समर्थकों के लिए वकार “विश्वासघाती” हैं, क्योंकि उन्होंने सरकार नहीं बचाई। वहीं कुछ इस्लामिस्ट और एनसीपी सर्किलों में उन्हें “भारत का एजेंट” कहा गया, क्योंकि उन्होंने हसीना को सुरक्षित निकलने दिया और कथित रूप से कई कट्टर कदमों पर रोक लगाई। 2026 में अवामी लीग के कुछ नेताओं ने उनकी नियुक्ति को हसीना की भूल बताया। द प्रिंट की अगस्त 2026 की रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से कहा गया कि वकार की भूमिका दोहरी दिखती है। एक तरफ हसीना के निकास में उनकी भूमिका पर सवाल हैं, दूसरी तरफ उन्होंने पद बचाने के लिए इस्लामिस्ट खेमे से समझौते की कोशिश की। अलग रिपोर्टों में पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की बातचीत और सेना प्रशिक्षण में इस्लामी अध्ययन जोड़ने जैसे कदम भी दर्ज हैं। ये घटनाएं सार्वजनिक बयानों और मीडिया रिपोर्टों पर टिकी हैं।

भारतीय विशेषज्ञों या लेखकों ने पिछले दो वर्षों में मुख्य रूप से पुस्तक और विश्लेषणों के जरिए हसीना खेमे के आरोपों को जगह दी है। इन्हें “काला चिट्ठा” कहना तथ्यात्मक निष्कर्ष नहीं, बल्कि एक पक्ष का आकलन है। स्वतंत्र रूप से यह साबित नहीं हुआ है कि वकार ने भारत-विरोधी माहौल खड़ा किया। सार्वजनिक रिकॉर्ड में उनके जनवरी 2025 के बयान भारत के खिलाफ सीधी कार्रवाई से दूरी बनाते हैं, जबकि हसीना समर्थक उन्हें विश्वासघात का जिम्मेदार मानते हैं। दोनों दावे राजनीतिक संदर्भ में पढ़े जाने चाहिए। बांग्लादेश सेना ने औपचारिक रूप से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है और वकार पद पर बने रहे हैं।

संक्षेप में, जनरल वकार हसीना द्वारा नियुक्त सेना प्रमुख हैं, जिन्होंने 5 अगस्त 2024 को उनके प्रस्थान की घोषणा की और सुरक्षित निकास में सेना की भूमिका रही। भारत-विरोधी माहौल मुख्य रूप से राजनीतिक दलों, छात्र समूहों और अंतरिम तथा बाद की सरकारों के विमर्श से जुड़ा रहा। सेना प्रमुख पर लगे गंभीर आरोप अभी आरोप हैं, प्रमाणित निष्कर्ष नहीं। संतुलित आकलन के लिए दोनों खेमों के बयानों और उनके सार्वजनिक साक्षात्कारों को साथ रखना जरूरी है।

नवीन कुमार

झारखंड के परिवेश से जुड़े रहे हैं। पहाड़, जंगल और छोटे कस्बों की जिंदगी उन्होंने करीब से देखी है। परिवार में सादगी और मेहनत का मूल्य सिखाया गया। वे लोगों से मिलना, उनकी बात सुनना और स्थानीय मेलों-त्योहारों में शामिल होना पसंद करते हैं। उनकी पहचान सीधेपन और जमीन से जुड़े रहन-सहन से है।

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