छत्तीसगढ़

शहर की सड़कों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त

नगर निगम कमिश्नर को कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 9 अक्टूबर। बिलासपुर शहर सहित छत्तीसगढ़ की बदहाल सड़कों को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि शपथपत्रों में सड़कों की स्थिति बेहद खराब बताई गई है, जबकि वर्ष 2021 में जनहित याचिका शुरू होने के बाद भी हालात में ठोस सुधार नहीं हुआ है।

सुनवाई के दौरान बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की हालत, मोपका-सेंदरी बाइपास और बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना को लेकर जवाब मांगे गए। कोर्ट ने आगामी पूजा पर्व से पहले सड़कों को चलने लायक बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआईए) के शपथपत्र से पता चला कि मोपका-सेंदरी सड़क अब तक प्राधिकरण को सौंपी नहीं गई है। फिलहाल यह सड़क लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकार क्षेत्र में है और इसके संचालन तथा रखरखाव की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार की है।

इस स्थिति पर हाईकोर्ट ने आश्चर्य जताया। कोर्ट की टिप्पणी थी कि ऐसा लगता है कि राज्य सरकार न तो परियोजना पूरी करने में दिलचस्पी दिखा रही है और न ही सड़क एनएचएआई को सौंपने में।

सुनवाई के दौरान बिलासपुर नगर निगम की ओर से कोई वकील उपस्थित नहीं था। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में नगर निगम कमिश्नर खुद उपस्थित हों या निगम की ओर से किसी सक्षम प्रतिनिधि को भेजें। आदेश का पालन नहीं होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

कोर्ट ने बिलासपुर-रायपुर सड़क परियोजना को पूरा करने की समयसीमा बताने के लिए एनएचएआई को निर्देश दिया है। बिलासपुर और रायपुर के परियोजना अधिकारियों को इस संबंध में शपथपत्र प्रस्तुत करना होगा।

जनहित याचिका में न्यायमित्र और वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव ने नगर निगम क्षेत्र की सड़कों की खराब हालत का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में एक भी सड़क ऐसी नहीं है, जिसे ठीक से इस्तेमाल करने लायक माना जा सके।

उन्होंने आशंका जताई कि पूजा पर्व से पहले मरम्मत नहीं हुई तो लोगों को दुर्घटनाओं और चोटों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने नगर निगम से तत्काल सड़कों को आवागमन के योग्य बनाने की मांग की।

नगर निगम की पांच प्रमुख सड़कों पर डामरीकरण का काम होना बाकी है। करीब 12 किलोमीटर लंबी इन सड़कों की अनुमानित लागत लगभग 50 करोड़ रुपये बताई गई है। ठेकेदारों ने डामर की कीमत बढ़ने और उसकी उपलब्धता में दिक्कत का हवाला देकर मौजूदा दरों पर काम करने में असमर्थता जताई है।

ठेकेदार संघ ने निर्माण लागत के अनुमान में संशोधन की मांग की है। यह प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। संशोधित दरों पर फैसला सरकार के निर्देश के बाद ही होगा। यदि लागत अनुमान बढ़ाए गए तो परियोजनाओं का कुल खर्च भी बढ़ सकता है।

इन सड़कों में अशोक नगर रोड, साइंस कॉलेज से सब्जी मंडी रोड, अपोलो रोड, स्मृति वन-शनि मंदिर रोड और अरपा अटल पथ शामिल हैं।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर 2026 को तय की है। नगर निगम कमिश्नर को तब तक अपने क्षेत्र की सड़कों की मरम्मत के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शपथपत्र में देना होगा।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button