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जापान में सर्वे: 57 प्रतिशत लोगों ने प्रधानमंत्री ताकाइची से चीन संबंध सुधारने के प्रयास बढ़ाने को कहा

जापानी अखबार आसाही शिंबुन के देशव्यापी टेलीफोन सर्वेक्षण में 57 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची को चीन के साथ संबंध सुधारने के प्रयास बढ़ाने चाहिए। यह सर्वेक्षण 26 और 27 सितंबर 2026 को किया गया। 35 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना था कि ऐसा करने की जरूरत नहीं है।

आसाही शिंबुन के अनुसार, जापान-चीन संबंध पिछले वर्ष नवंबर से तनावपूर्ण बने हुए हैं। तब ताकाइची ने संसद में कहा था कि ताइवान से जुड़ी किसी आकस्मिक स्थिति को जापान के लिए “अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करने वाली स्थिति” माना जा सकता है। जापानी कानून में यह वर्गीकरण सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार के इस्तेमाल की गुंजाइश खोल सकता है। चीन ने इन टिप्पणियों का विरोध किया था। ताकाइची ने बाद में कहा कि उनकी टिप्पणी काल्पनिक परिदृश्य पर आधारित थी।

सर्वेक्षण में राय समर्थन के आधार पर अलग-अलग रही। ताकाइची मंत्रिमंडल के समर्थकों में 51 प्रतिशत ने संबंध सुधारने के अधिक प्रयास को जरूरी बताया, जबकि 44 प्रतिशत ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है। मंत्रिमंडल का समर्थन न करने वालों में 69 प्रतिशत ने अधिक प्रयास की मांग की और 25 प्रतिशत ने इसे अनावश्यक माना।

आसाही शिंबुन के बाद के विश्लेषण के अनुसार, 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में 67 प्रतिशत ने संबंध सुधार को जरूरी बताया। 18 से 29 वर्ष की आयु में यह आंकड़ा 59 प्रतिशत रहा। 40 वर्ष की आयु वर्ग में 52 प्रतिशत ने कहा कि अधिक प्रयास की जरूरत नहीं है, जबकि 42 प्रतिशत ने जरूरत बताई। महिलाओं में 59 प्रतिशत और पुरुषों में 54 प्रतिशत ने संबंध सुधार के प्रयास बढ़ाने का समर्थन किया।

उसी सर्वेक्षण में इस सितंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ ताकाइची की बैठक का आकलन अपेक्षाकृत सतर्क रहा। लगभग 44 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बैठक को सकारात्मक माना, जबकि 38 प्रतिशत ने ऐसा नहीं माना। तुलना में, अक्टूबर 2025 में पद संभालने के तुरंत बाद ट्रंप के साथ पहली बैठक को 67 प्रतिशत लोगों ने सकारात्मक आंका था।

टोक्यो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शिन कावाशिमा ने जे-कास्ट न्यूज से कहा कि जापान, अमेरिका और चीन के संबंधों को त्रिकोण के रूप में देखा जाए तो चीन और अमेरिका के बीच संवाद बढ़ रहा है, जबकि जापान-चीन संबंध अपेक्षाकृत खाली पड़े हैं। जापान के पूर्व उप विदेश मंत्री हितोशी तनाका ने कहा कि यदि यह स्थिति जारी रही तो इसे जापानी कूटनीति की विफलता माना जा सकता है। उन्होंने संबंधों में गिरावट का एक कारण ताकाइची की टिप्पणियों को भी बताया।

महंगाई पर असंतोष बढ़ा

उसी आसाही सर्वेक्षण में महंगाई से निपटने के सरकारी उपायों को केवल 28 प्रतिशत लोगों ने सही माना। यह पिछले सर्वेक्षण के 34 प्रतिशत से कम है। असंतुष्टों की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से बढ़कर 59 प्रतिशत हो गई।

सरकार ने अप्रैल 2027 से दो वर्ष के लिए खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर 8 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ कम और मध्यम आय वाले लोगों के लिए नकद सहायता की भी बात है। सर्वेक्षण में इस योजना का समर्थन 44 प्रतिशत और विरोध 47 प्रतिशत रहा।

सबसे बड़ी चिंता धन के स्रोत को लेकर रही। 76 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि सरकार द्वारा राजस्व स्रोत स्पष्ट न करना समस्या है। इनमें 41 प्रतिशत ने इसे बहुत गंभीर समस्या और 35 प्रतिशत ने कुछ हद तक समस्या बताया। मंत्रिमंडल समर्थकों में 67 प्रतिशत और लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में 66 प्रतिशत ने भी धन स्रोत के खुलासे की कमी को समस्या माना।

सरकार की आर्थिक रणनीति में अस्थायी खाद्य कर कटौती, औद्योगिक सब्सिडी और रक्षा खर्च बढ़ाने के उपाय शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में ताजा खाद्य पदार्थों को छोड़कर मूल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक साल-दर-साल 1.7 प्रतिशत बढ़ा। यह लगातार वृद्धि का 60वां महीना था।

अजय यादव

एक सीधे-सादे स्वभाव के व्यक्ति हैं। बचपन से ही अपने आसपास की बातों को याद रखने की आदत रही। परिवार में बड़ों का आदर और मेहनत की सीख मिली। वे सड़कों पर घूमना, बस-स्टैंड और बाजार की हलचल देखना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि असली तस्वीर वही है जो आम दिन में दिखती है, किसी मंच पर नहीं।

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