तकनीकी बाधाओं से बचने के लिए इसरो ने एनवीएस-03 उपग्रह को पाइरो वाल्व खुले रखकर प्रक्षेपित किया : नारायणन

(जेमिमा रमन)
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 31 अक्टूबर। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख वी. नारायणन ने शनिवार को कहा कि मिशन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और पहले आई तकनीकी बाधाओं से बचने के लिए एनवीएस-03 उपग्रह को तीन पाइरो वाल्व खुले रखकर संचालित किया गया।
पाइरो वाल्व अंतरिक्ष यान और उपग्रहों की प्रणोदन प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले विशेष प्रकार के वाल्व होते हैं। इनका काम ईंधन या ऑक्सीडाइजर के प्रवाह को नियंत्रित करना है।
प्रक्षेपण के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मीडिया को संबोधित करते हुए नारायणन ने बताया कि इस तकनीकी निर्णय को पूर्व इसरो प्रमुख किरण कुमार की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तर की समिति ने कंपन और झटकों से संबंधित गहन परीक्षणों के बाद मंजूरी दी थी।
पाइरो वाल्व अंतरिक्ष यान की प्रणोदन प्रणाली के अहम हिस्से होते हैं। एनवीएस शृंखला का दूसरा उपग्रह एनवीएस-02 वर्ष 2025 में प्रक्षेपित किया गया था, लेकिन उसका मिशन विफल रहा था।
एक उच्चस्तरीय समिति ने विस्तृत जांच के बाद निष्कर्ष निकाला था कि उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में ऊपर उठाने वाले इंजन की ऑक्सीडाइजर लाइन के पाइरो वाल्व तक चालक विद्युत संकेत नहीं पहुंचा था।
फरवरी 2026 में इसरो ने समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि इसकी सबसे संभावित वजह कनेक्टर के मुख्य और वैकल्पिक, दोनों सिग्नल मार्गों में कम से कम एक संपर्क बिंदु का अलग हो जाना था।
इस पृष्ठभूमि में नारायणन ने कहा कि भारत की नौवहन उपग्रह प्रणाली में एनवीएस-01 सहित चार उपग्रह अब सक्रिय हैं। इसरो अगले पांच महीने में एनवीएस-04 और 10 महीने में एनवीएस-05 का प्रक्षेपण करने की योजना बना रहा है, ताकि इस उपग्रह समूह को और मजबूत किया जा सके।
नारायणन ने प्रक्षेपण की असाधारण सटीकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा,पृथ्वी से उपग्रह की सबसे कम दूरी वाले बिंदु (पेरिजी) की निर्धारित ऊंचाई 170.36 किलोमीटर थी, जबकि हमने इसे 170.31 किलोमीटर पर हासिल किया।
उन्होंने कहा, पृथ्वी से उपग्रह की सबसे अधिक दूरी वाले बिंदु (अपोजी) की निर्धारित ऊंचाई 37,247 किलोमीटर थी, जबकि हमने 38,080 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की।
उन्होंने कहा, यह दुनिया के किसी भी प्रक्षेपण यान की सबसे सटीक उड़ानों में से एक है।
इस उपग्रह के सफलतापूर्वक स्थापित होने से भारत की क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली नाविक (नेविगेशन विद इंडियन कांस्टेलेशन) फिर से चार उपग्रहों की न्यूनतम परिचालन क्षमता पर पहुंच गई है। इससे पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में सामरिक और नागरिक, दोनों तरह की स्थान-निर्धारण सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
एनवीएस-03 उपग्रह का वजन 2,240 किलोग्राम है।
भारी उपग्रहों को प्रक्षेपित करने वाले रॉकेट के लिए अब तक का सबसे कम समय में अगला प्रक्षेपण करते हुए इसरो ने शनिवार तड़के जीएसएलवी-एफ18 प्रक्षेपण यान की मदद से नयी पीढ़ी के नौवहन उपग्रह एनवीएस-03 को बेहद सटीक कक्षा में स्थापित किया।
नारायणन ने कहा, मिशन की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने और पहले आई तकनीकी बाधाओं से बचने के लिए इसरो ने उपग्रह को तीन पाइरो वाल्व पहले से खुले रखकर प्रक्षेपित किया। उन्होंने बताया कि इस तकनीकी निर्णय को पूर्व इसरो प्रमुख किरण कुमार की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय स्तर की समिति ने कंपन और झटकों से संबंधित गहन परीक्षणों के बाद मंजूरी दी थी।
नाविक के असैन्य उपयोगों के बारे में विस्तार से बताते हुए इसरो प्रमुख ने कहा कि फिलहाल 10,400 रेल इंजन और 64,000 मछली पकड़ने वाली नौकाओं की वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत इसरो का लक्ष्य अगले छह महीनों में निगरानी के दायरे में आने वाली मछली पकड़ने वाली नौकाओं की संख्या बढ़ाकर एक लाख करना है।
उन्होंने बताया कि वाहनों में कुल 15 लाख निगरानी उपकरण लगाए गए हैं। यह पूछे जाने पर कि नाविक की सुविधा आम लोगों के मोबाइल फोन में कब उपलब्ध होगी, इस पर नारायणन ने कहा कि सात उपग्रहों का पूरा समूह तैयार होने के बाद ऐसा हो सकेगा।
आगामी व्यस्त प्रक्षेपण कार्यक्रम के बारे में इसरो अध्यक्ष ने बताया कि अंतरिक्ष एजेंसी की इस वित्त वर्ष में पांच और प्रक्षेपण करने की योजना है। इनमें गगनयान का पहला मानवरहित मिशन (जी-1) और छोटे उपग्रहों के मिशन शामिल होंगे।(भाषा)


