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पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह का बड़ा बयान: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दर्ज हो आपराधिक मामला

नई दिल्ली: मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके और देश के पूर्व गृह सचिव आर.के. सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की है। आर.के. सिंह सीईसी के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव की कोशिशों से भी संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने इसे नाकाफी बताते हुए कड़े कदम उठाने की वकालत की है。

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में पूर्व आईएएस अधिकारी आर.के. सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक खुला पत्र जारी कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर देश भर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। सिंह के अनुसार, यह कार्रवाई ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम’ की धारा 21 और सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का स्पष्ट उल्लंघन है。

विपक्ष के रुख से असंतुष्ट क्यों हैं पूर्व गृह सचिव?

विपक्ष के 193 सांसदों ने हाल ही में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए महाभियोग (इम्पीचमेंट) प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष ने मतदाता सूची से नाम गलत तरीके से हटाने और चुनावी प्रक्रिया में भेदभाव का आरोप लगाया है। हालांकि, आर.के. सिंह का मानना है कि एक आपराधिक कृत्य के लिए केवल महाभियोग लाना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की है कि जब तक सीईसी और अन्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते, तब तक विपक्ष को चुनावों का पूरी तरह से बहिष्कार करना चाहिए।

चुनाव आयोग के आंतरिक फैसलों पर उठाए सवाल

आर.के. सिंह ने वोटर रजिस्ट्रेशन के ‘फॉर्म 6’ और ‘फॉर्म 7’ में किए गए बदलावों को भी गैर-कानूनी बताया। नए नियमों के तहत आवेदकों से उनके माता-पिता के 2003 की वोटर लिस्ट का सीरियल नंबर मांगा जा रहा है। सिंह का तर्क है कि 18 साल के युवा के लिए दशकों पुराना रिकॉर्ड खोजना लगभग असंभव है, और यह जानबूझकर युवा मतदाताओं का पंजीकरण रोकने की साजिश है।
उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चुनाव आयोग के भीतर ही इन फैसलों पर सहमति नहीं थी। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर आपत्ति जताई थी। आर.के. सिंह का सवाल है कि जब आयोग में बहुमत इन बदलावों के खिलाफ था, तो ये नियम किसके आदेश पर लागू किए गए? इन सभी कथित मनमानियों के आधार पर उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सख्त कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की मांग की है。

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