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महिंद्रा और एम्ब्रेयर ने नागपुर को C-390 मिलेनियम की संभावित फाइनल असेंबली लाइन के लिए चुना, परियोजना आईएएफ ऑर्डर पर निर्भर

मुंबई, 1 अक्टूबर 2026: महिंद्रा ग्रुप और ब्राजील की एम्ब्रेयर ने भारतीय वायुसेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के लिए नागपुर को C-390 मिलेनियम सैन्य परिवहन विमान की संभावित फाइनल असेंबली लाइन के स्थान के रूप में चिह्नित किया है। दोनों कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा तभी आगे बढ़ेगी, जब भारत सरकार C-390 मिलेनियम का चयन करे और इस कार्यक्रम के तहत ऑर्डर दे।

कंपनी के संयुक्त बयान के अनुसार, महिंद्रा और एम्ब्रेयर महाराष्ट्र सरकार के साथ काम कर रहे हैं, ताकि कार्यक्रम मिलने पर आवश्यक औद्योगिक ढांचा जल्दी तैयार किया जा सके। महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप एग्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य विनोद सहाय ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर में जमीन आवंटित करने और संबंधित जरूरतों में तेजी से सहयोग किया है। प्रस्तावित सुविधा विमान असेंबली, सिस्टम इंटीग्रेशन, मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग और स्थानीय सप्लाई चेन विकास पर केंद्रित होगी।

यह घोषणा पुष्टि नहीं है कि असेंबली लाइन स्थापित हो चुकी है या उत्पादन शुरू होने वाला है। कंपनियों ने इसे तैयारी का चरण बताया है। कार्यक्रम मिलने पर साझेदारी भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों को धीरे-धीरे C-390 इकोसिस्टम में शामिल करने का इरादा रखती है। इसमें निर्माण, आफ्टरमार्केट सेवाएं, प्रशिक्षण और लाइफसाइकिल सपोर्ट शामिल होंगे। कंपनियों का कहना है कि यह योजना मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों के अनुरूप है।

एम्ब्रेयर डिफेंस एंड सिक्योरिटी के प्रेसिडेंट और सीईओ बोस्को दा कोस्टा जूनियर ने नागपुर की पहचान को भारत में लंबे समय का एयरोस्पेस इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। द हिंदू बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि इस परियोजना से करीब 6,000 करोड़ रुपये का निवेश और लगभग 1,000 रोजगार जुड़ सकते हैं। यह आंकड़ा कंपनी के संयुक्त बयान में शामिल नहीं है।

साझेदारी और प्रतिस्पर्धा

एम्ब्रेयर और महिंद्रा ने फरवरी 2024 में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। अक्टूबर 2025 में दोनों ने स्ट्रैटेजिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट किया, जिसके तहत भारत में औद्योगिकीकरण, स्थानीय निर्माण, असेंबली, सप्लाई चेन और मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल पर सहयोग का प्रावधान है। फरवरी 2026 में कंपनियों ने C-390 की एमआरओ क्षमता विकसित करने की योजना भी बताई थी, जो चयन पर निर्भर है।

दोनों कंपनियां भारतीय वायुसेना के मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के लिए संयुक्त रूप से बोली लगा रही हैं। इस कार्यक्रम का मकसद पुराने हो रहे एएन-32 और आईएल-76 विमानों की जगह मध्यम परिवहन क्षमता वाला प्लेटफॉर्म लाना है। लॉकहीड मार्टिन, जिसने टाटा ग्रुप के साथ साझेदारी की है, इस प्रतिस्पर्धा में दूसरी प्रमुख दावेदार है। रॉयटर्स के अनुसार, एम्ब्रेयर भारत को C-390 की वैश्विक बिक्री के लिए रणनीतिक बाजार मानती है और यहां 60 से 80 विमानों के ऑर्डर की संभावना देखती है। यह कंपनी का आकलन है, पुष्ट ऑर्डर नहीं।

C-390 मिलेनियम जेट इंजन वाला सैन्य परिवहन विमान है, जो माल, सैनिकों और उपकरणों की ढुलाई के साथ अन्य सैन्य कार्यों के लिए इस्तेमाल होता है। नागपुर को स्थान चुनने से मध्य भारत में एयरोस्पेस निर्माण की संभावना मजबूत होती है, लेकिन अंतिम निवेश, उत्पादन समयसीमा और असेंबली लाइन की स्थापना भारत सरकार के चयन और ऑर्डर पर निर्भर रहेगी।

कविता मिश्रा

घर-गृहस्थी के बीच पली-बढ़ीं। परिवार, रिश्ते और रोजमर्रा के काम उनकी जिंदगी का बड़ा हिस्सा रहे। उन्हें किचन में समय बिताना, त्योहारों की तैयारी और पड़ोसियों से बात करना अच्छा लगता है। वे चुपचाप देखती हैं और मन में बातें रखती हैं। उनकी सोच घर और आसपास के जीवन से निकली हुई है।

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