गांधी जयंती पर वोट चोरी के आरोपों को लेकर प्रदर्शन, राहुल गांधी ने कहा—ज्ञानेश कुमार जाएंगे, उन्हें बिठाने वाला सिस्टम भी जाएगा

नई दिल्ली, 2 अक्टूबर 2026: गांधी जयंती के दिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनों का समर्थन किया और कहा कि ज्ञानेश कुमार जाएंगे तथा उन्हें इस पद पर बिठाने वाला सिस्टम भी जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि युवा वोट चोरी के खिलाफ शांतिपूर्वक सड़कों पर हैं, जबकि सरकार प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही है।
राहुल गांधी ने एक्स पर हिंदी में पोस्ट करते हुए लिखा कि आज गांधी जयंती है और हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ सड़कों पर हैं—शांतिपूर्वक, बिना हिंसा के, अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए। उन्होंने कहा कि उनकी मांग स्पष्ट है: ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें, लोकतंत्र बचाओ।
पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-शाह सरकार का जवाब यह है कि लड़के-लड़कियों को सड़कों से घसीटा जा रहा है और सैकड़ों हिरासत में हैं। उनका एकमात्र अपराध यह है कि उन्होंने वोट चोरी पर सवाल उठाया। उन्होंने महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए लिखा कि बापू ने यही सिखाया—सच बोलो, शांति से लड़ो—और इसी से यह सरकार सबसे ज्यादा डरती है। उन्होंने आगे कहा कि लाठी भीड़ को रोक सकती है, सवाल को नहीं। ज्ञानेश कुमार जाएंगे और उन्हें बिठाने वाला सिस्टम भी जाएगा।
दिल्ली और अन्य शहरों में प्रदर्शन
राहुल गांधी का यह बयान तब आया, जब विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और युवा समूहों ने दिल्ली, मुंबई तथा अन्य शहरों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर प्रदर्शन किए। दिल्ली में जंतर-मंतर के पास आम आदमी पार्टी, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया और इंडियन यूथ कांग्रेस समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता जुटे। रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी में 700 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन अहमदाबाद, लखनऊ और पटना सहित कई अन्य जगहों पर भी हुए। ये विरोध इंडिया गठबंधन की उस योजना का हिस्सा थे, जिसके तहत 2 अक्टूबर से लोकतंत्र बचाओ के नाम पर देशव्यापी प्रदर्शन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की मांग तय की गई थी। गठबंधन की बैठक में करीब 19 दलों ने भाग लिया था और 6 अक्टूबर को सांसदों के निर्वाचन आयोग तक मार्च तथा राष्ट्रपति से मुलाकात की बात भी कही गई थी।
आरोपों की पृष्ठभूमि
यह विवाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। 24 सितंबर 2026 को राहुल गांधी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की थी। उन्होंने उन्हें देशद्रोही करार दिया और कहा था कि वे अप्रूवर बन जाएं। उन्होंने दावा किया था कि 2024 के लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव फर्जी थे तथा वोट चोरी से कानून चोरी और संस्था चोरी होती है।
उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट का हवाला दिया था, जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब दस महीनों में कम से कम 14 आपत्तियां दर्ज कीं। ये आपत्तियां आदेश, सॉफ्टवेयर बदलाव, मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और डेटाबेस तक पहुंच जैसे मुद्दों से जुड़ी बताई गईं। राहुल गांधी ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की भी जांच होगी।
ये दावे राहुल गांधी और विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं। अभी तक किसी अदालत या आधिकारिक जांच में वोट चोरी साबित नहीं हुई है। निर्वाचन आयोग का पक्ष रिपोर्टों में यह रहा है कि SIR से जुड़े फैसले तीन सदस्यीय आयोग ने सर्वसम्मति से लिए। सरकार और भारतीय जनता पार्टी इन आरोपों को पहले भी खारिज कर चुकी हैं और इन्हें संस्थाओं पर हमला बताती रही हैं।
क्या कहा गया, क्या साबित नहीं
तथ्य यह है कि 2 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी ने एक्स पर उपरोक्त बयान दिया और कई शहरों में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए, जिनमें दिल्ली में बड़ी संख्या में हिरासत की खबरें हैं। यह भी दर्ज है कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की मीडिया रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने दबाव बढ़ाया।
यह साबित नहीं है कि चुनाव चोरी हुए, या ज्ञानेश कुमार ने कोई अपराध किया, या उन्हें पद पर बिठाने वाली व्यवस्था समाप्त होगी। ज्ञानेश कुमार पद पर हैं और उनके इस्तीफे या किसी औपचारिक जांच की आधिकारिक घोषणा इन रिपोर्टों में नहीं है। लाठीचार्ज या हिरासत की संख्या अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न हो सकती है; दिल्ली में 700 से अधिक हिरासत का आंकड़ा समाचार एजेंसियों और अखबारों की रिपोर्टों पर आधारित है।



