अमेरिका में कई भारतीय आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड पर रोक

-सोनम मिश्रा
ट्रंप प्रशासन ने माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो समेत कई कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदन रोक दिए हैं.अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देकर अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और वेतन को प्रभावित कर सकती हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यह रोक तब तक जारी रह सकती है, जब तक कंपनियां अपनी भर्ती प्रक्रिया में बदलाव नहीं करतीं.
अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने इन आईटी कंपनियों पर स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (पीईआरएम) के दुरुपयोग का आरोप लगाया. यह कार्यक्रम अब तक विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड आवेदन के लिए एक वैध कानूनी तरीका हुआ करता था.सोंडरलिंग ने कहा, यहां मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम से निलंबित कर रहा हूं.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा, अमेरिका में शायद ही कोई कंपनी होगी, जिसने माइक्रोसॉफ्ट से ज्यादा इसका दुरुपयोग किया हो.
माइक्रोसॉफ्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके अधिकांश कर्मचारी अमेरिकी हैं. कंपनी ने कहा कि वह अमेरिकी प्रशासन को अतिरिक्त जानकारी देने के लिए तैयार है. एच-1बी वीजा के लिए किए गए उसके ज्यादातर आवेदन अमेरिका में पहले से रह रहे कर्मचारियों के वीजा स्टेटस को बढ़ाने या बदलने से जुड़े हैं. माइक्रोसॉफ्ट की 2025 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी में अमेरिका के करीब 1.25 लाख और दूसरे देशों के लगभग 1.03 लाख कर्मचारी काम करते हैं.
इसके अलावा हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड समेत 9 प्रमुख विश्वविद्यालयों की भी विदेशी वीजा के कथित दुरुपयोग और रिसर्च फंडिंग में गड़बड़ी को लेकर जांच की जा रही है. इस फैसले से अमेरिका में स्थायी ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया में जुटे भारतीय आईटी पेशेवरों पर भी असर पड़ सकता है.(dw.com/hi)



