शिक्षण के नये, तकनीक-सक्षम और शिक्षार्थी-केंद्रित तरीकों पर कलिंगा विवि में कार्यशाला, विचार-विमर्श

रायपुर, 15 अक्टूबर। कलिंगा विश्वविद्यालय ने बताया कि शिक्षा संकाय ने 5 से 12 अक्टूबर 2026 तक शिक्षक नवाचार चुनौती सीखें, सृजन करें और पढ़ाएं शीर्षक से सात दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में शिक्षकों और भावी शिक्षकों को एक साथ लाकर शिक्षण के नवीन, तकनीक-सक्षम और शिक्षार्थी-केंद्रित तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया।
कलिंगा ने बताया कि इस सात दिवसीय ऑनलाइन कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण, डिजिटल शिक्षाशास्त्र, समावेशी कक्षाओं और योग्यता-आधारित मूल्यांकन के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए प्रतिभागियों और विषय विशेषज्ञों को एक मंच पर लाया गया।
कलिंगा ने बताया कि समझौता ज्ञापन के साझेदारों के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला को संवादात्मक और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से पारंपरिक व्याख्यान आधारित शिक्षण पद्धति से आगे बढऩे के उद्देश्य से तैयार किया गया था। प्रत्येक सत्र में प्रतिभागियों को कक्षा की व्यावहारिक परिस्थितियों का समाधान खोजने, शिक्षण संसाधन विकसित करने और नवीन शैक्षणिक तरीकों को प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यशाला की रिपोर्ट के अनुसार, सभी पंजीकृत प्रतिभागियों ने इसमें भाग लिया और संकाय के छह सदस्य इस कार्यक्रम से जुड़े रहे।
कलिंगा ने बताया कि कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के शैक्षणिक संस्थानों से आए विशेषज्ञों के नेतृत्व में सात विषयगत सत्र आयोजित किए गए। इनमें शिक्षण प्रदर्शन, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों का निर्माण, समावेशी कक्षा प्रबंधन, मूल्यांकन की रणनीतियां, व्यावसायिक आत्मचिंतन और व्यावहारिक शैक्षणिक नवाचार जैसे विषय शामिल रहे।
कलिंगा ने बताया कि 5 अक्टूबर को कार्यक्रम की शुरुआत दीवान वीएस इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. विकास भारद्वाज द्वारा संचालित कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षण विशेषज्ञ चुनौती सत्र से हुई। इस सत्र में लघु शिक्षण प्रदर्शनों और सहकर्मी मूल्यांकन के माध्यम से व्यावहारिक शिक्षाशास्त्र पर जोर दिया गया। 6 अक्टूबर को इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर के डॉ. बिजेंद्र सिंह ने पाठ्यपुस्तक के बिना पढ़ाएं विषय पर सत्र का नेतृत्व किया।



