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दिल्ली: जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू, 11 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी; जानें क्या है यह नया कानून

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इलाके में धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके चलते कई सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं, जिसका सीधा असर आम जनजीवन और यातायात पर पड़ रहा है।

यातायात और मेट्रो पर असर

विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा स्थितियों को देखते हुए दिल्ली पुलिस और DMRC ने आम लोगों की सुरक्षा के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी: दिल्ली मेट्रो के 11 प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री (Entry) और एग्जिट (Exit) बंद कर दी गई है। यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
  • ट्रैफिक एडवाइजरी: नई दिल्ली और जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले कई रास्तों को डायवर्ट किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से इन मार्गों पर जाने से बचने की अपील करते हुए एडवाइजरी जारी की है।
  • सुरक्षा बलों की तैनाती: कानून व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और बैरिकेडिंग की गई है।

क्या है धारा 163 (What is Section 163)?

हाल ही में भारत में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों के तहत, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 ने पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की चर्चित धारा 144 की जगह ली है। इसका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थितियों में शांति व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित खतरे, दंगे या उपद्रव को रोकना है।

धारा 163 लागू होने पर क्या पाबंदियां होती हैं?

इस धारा के लागू होने का मतलब है कि प्रशासन ने उस क्षेत्र में विशेष प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • भीड़ जुटने पर रोक: किसी भी सार्वजनिक स्थान पर 5 या उससे अधिक लोगों के एक साथ इकट्ठा होने (गैर-कानूनी जमावड़ा) पर सख्त मनाही होती है।
  • प्रदर्शन पर प्रतिबंध: बिना पुलिस की पूर्व अनुमति के किसी भी तरह के धरने, जुलूस, रैली या विरोध प्रदर्शन की इजाजत नहीं होती है।
  • हथियार ले जाने पर रोक: इस दौरान किसी भी प्रकार के लाठी, डंडे या हथियार ले जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध होता है।
  • सख्त कार्रवाई: आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को पुलिस तुरंत हिरासत में ले सकती है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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