छत्तीसगढ़

किंग चार्ल्स ने ग़ुलामों के व्यापार को बताया ‘शर्मनाक इतिहास’

ब्रिटेन के किंग चार्ल्स ने एंटीगुआ और बारबुडा में राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं की बैठक का उद्घाटन किया. इस मौक़े पर उन्होंने ग़ुलामों के व्यापार के इतिहास का ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा कि इतिहास का यह शर्मनाक दौर उन्हें डराता है. किंग चार्ल्स ने इस मुद्दे पर अपनी निजी भावनाएं भी ज़ाहिर कीं.

हालांकि, उन्होंने ब्रिटेन की ओर से सीधे तौर पर माफ़ी नहीं मांगी.

बीबीसी के वरिष्ठ रॉयल संवाददाता के मुताबिक़, किंग ने अपने भाषण में सोच-समझकर शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने इस मुद्दे पर निजी तौर पर बात की, जिसका वहां मौजूद नेताओं पर असर पड़ सकता है.

किंग चार्ल्स ने दुनिया के सामने मौजूद कई बड़ी चुनौतियों का भी ज़िक्र किया.

उन्होंने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे भीषण संघर्षों, जलवायु परिवर्तन के गंभीर असर और तेजी से बदलती तकनीक का ज़िक्र किया.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने इस बैठक में कहा कि वह ग़ुलामों के व्यापार के लिए ब्रिटेन की ओर से औपचारिक माफ़ी मांगने के विचार के ख़िलाफ़ नहीं हैं.

हालांकि, उनका मानना है कि मुआवज़ा देना इसका सही रास्ता नहीं है. बर्नहम राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं के साथ बातचीत में कर्ज़ से जुड़ी एक नई योजना भी रख सकते हैं.

इसका मक़सद उन देशों की मदद करना है, जिन्हें कर्ज़ पर बढ़ते ब्याज का बोझ उठाना पड़ रहा है.

राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं की यह बैठक हर दो साल में होती है. इसमें 56 देशों के नेता और प्रतिनिधि आपसी साझेदारी के भविष्य पर चर्चा करते हैं.(bbc.com/hindi)

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