देश

शराब का नया ट्रेंड: युवा बना रहे दूरी, 50 के पार वालों में क्यों बढ़ रही लत?

शराब पीने को लेकर एक नया और चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 40 साल से कम उम्र के युवाओं में शराब पीने का चलन कम हुआ है। वहीं, 50 से 64 साल की उम्र के लोगों में शराब पीने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। इतना ही नहीं, इस उम्र के कई लोग पहले के मुकाबले अधिक शराब पीने लगे हैं।

युवाओं में घट रहा शराब का चलन

हालिया शोध के अनुसार, 2022 से 2024 के बीच युवाओं (विशेषकर जेन-जी और 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों) में शराब की खपत में गिरावट दर्ज की गई है। कोरोना महामारी के बाद से युवा तेजी से शराब से दूरी बना रहे हैं। आंकड़ों की बात करें तो 2018 तक 40 साल से कम उम्र के 66% लोग शराब पीते थे, जो 2020 में बढ़कर 69% हो गया था, लेकिन 2024 में यह आंकड़ा गिरकर 67% रह गया है। इनमें 26 से 30 साल के युवा भी शामिल हैं।

50 की उम्र के बाद क्यों चिंताजनक है यह ट्रेंड?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 50 से 64 साल की उम्र में शराब का अधिक सेवन बेहद चिंता का विषय है। इस उम्र में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, लिवर और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। ऐसे में शराब का ज्यादा सेवन इन जोखिमों को कई गुना बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उम्र के लोग अक्सर अधिक मानसिक तनाव का सामना करते हैं, जिसे कम करने के लिए वे शराब का सहारा ले रहे हैं। हालांकि, मानसिक तनाव युवाओं में भी है, लेकिन वे इससे निपटने के लिए शराब के बजाय अन्य विकल्पों की ओर जा रहे हैं। तनाव के समय शराब को राहत का जरिया मान लेना धीरे-धीरे एक गंभीर लत में बदल सकता है।

वैश्विक और भारतीय बाजार की स्थिति

वर्तमान में जो लोग कभी-कभार शराब पीते हैं, उनमें से 53% अब इसकी खपत कम करने की कोशिश कर रहे हैं (यह आंकड़ा पांच साल पहले 44% था)। इसके अलावा, कभी शराब न पीने वालों की संख्या में भी 2020 के बाद 3% की वृद्धि हुई है।

वैश्विक स्तर पर 2024 में शराब की कुल खपत 253 बिलियन लीटर तक पहुंच गई है, लेकिन इसकी विकास दर काफी धीमी हो गई है। इसके विपरीत, नॉन-अल्कोहोलिक स्पिरिट्स (बिना अल्कोहल वाले पेय) की बिक्री में 17% का भारी उछाल आया है, और 2029 तक इस बाजार के 24% तक बढ़ने का अनुमान है।

भारत का तेजी से बढ़ता बाजार: वैश्विक रुझानों के उलट, भारत में 2024 से 2029 के बीच शराब की खपत में 357 मिलियन लीटर की वृद्धि होने की संभावना है। यह भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते शराब बाजारों में से एक बनाता है।

युवाओं की पसंद: ‘कम पिएंगे, लेकिन अच्छी पिएंगे’

आज की पीढ़ी केवल सस्ती शराब की तलाश नहीं करती। उनकी प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है। वे निम्न बातों पर अधिक फोकस करते हैं:

  • अलग स्वाद: ऐसी शराब जिसका टेस्ट और फ्लेवर यूनीक हो (जैसे वोदका के नए फ्लेवर्स)।
  • बेहतरीन क्वालिटी: प्रीमियम और उच्च गुणवत्ता वाली शराब।
  • ब्रांड वैल्यू: ऐसी शराब जिसकी अपनी एक खास पहचान और स्टेटस हो।

शराब कंपनियों का मुनाफा कैसे बढ़ रहा है?

भले ही युवाओं ने शराब पीना कम कर दिया हो, लेकिन शराब कंपनियों के बिजनेस में तेजी जारी है। इसका मुख्य कारण ‘प्रीमियमकरण’ है। युवा मात्रा (Quantity) के बजाय गुणवत्ता (Quality) पर जोर दे रहे हैं। वे जब भी पीते हैं, महंगी और अच्छी क्वालिटी की शराब चुनते हैं।

उपभोक्ताओं की इस बदलती मांग और प्रीमियम उत्पादों की ओर झुकाव के कारण रैडिको खेतान, यूनाइटेड स्पिरिट्स और यूनाइटेड ब्रुअरीज जैसी कंपनियां बाजार में शानदार प्रदर्शन कर रही हैं और उनकी कमाई में लगातार इजाफा हो रहा है।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button