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नेहा बोरा को Gen Z आइकॉन बताने वाली पोस्ट पर अभिजीत दीपके ने कहा- मैं सहमत हूं

नई दिल्ली: वोटर सूची संशोधन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के बीच सोशल मीडिया पर एक तुलनात्मक पोस्ट चर्चा में आ गई। एक्स यूजर अमोक ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की तस्वीर के साथ लिखा कि परिपक्वता तब है जब यह एहसास हो कि नेहा बोरा अभिजीत दीपके से ज्यादा प्रतिभाशाली हैं। यूजर ने बोरा को जेन-जी की संपूर्ण आइकॉन बताया और उनके व्यक्तित्व के असर को रेखांकित किया।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा, “मैं इससे सहमत हूं।” उनके इस संक्षिप्त जवाब के बाद कई यूजर्स ने इसे विनम्रता माना, जबकि कुछ ने दोनों युवा चेहरों की तुलना को अनावश्यक बताया।

नेहा बोरा का जवाब: तुलना नहीं, एकजुटता

इसके कुछ समय बाद नेहा बोरा ने एक्स पर लिखा, “तुलना नहीं, एकजुटता। हम इसके खिलाफ मिलकर लड़ते हैं।” दीपके ने उनके पोस्ट के जवाब में “इंकलाब जिंदाबाद” लिखा। दोनों के इस आदान-प्रदान ने चर्चा को और बढ़ा दिया।

नेहा बोरा आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और चुनावी rolls के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छात्र प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं। 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतिबंध के बावजूद हुए प्रदर्शन में वे उन लोगों में शामिल थीं जिन्हें हिरासत में लिया गया। बाद में उन्होंने प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर लौटकर विरोध जारी रखने की अपील की थी।

वोटर सूची और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन

अभिजीत दीपके सीजेपी के जरिए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पार्टी और सहयोगी समूहों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम वोटर सूची से हटाए गए और इससे सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचने की आशंका है। चुनाव आयोग और सरकार इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं। आयोग का कहना है कि प्रक्रिया का मकसद डुप्लीकेट, मृतक और अयोग्य नाम हटाना है।

2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में सीजेपी के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ, जबकि दिल्ली में जंतर-मंतर पर वामपंथी छात्र संगठनों, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य समूहों के कार्यकर्ताओं को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक दिल्ली में सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया। दीपके ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा और जंतर-मंतर पर अगला चरण आने वाला है।

इससे पहले अगस्त में नेहा बोरा कह चुकी थीं कि जेन-जी को न तो उनकी जरूरत है और न ही अभिजीत दीपके की। उनके अनुसार देशभर के छात्र सिस्टम की खामियों को समझकर खुद मुद्दे उठा रहे हैं। शनिवार की सोशल मीडिया चर्चा उसी पृष्ठभूमि में हुई, जब दोनों अलग-अलग मंचों से एक ही मांग को लेकर सड़क पर हैं।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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