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भारतीय सेना पश्चिमी क्षेत्र के संवेदनशील ठिकानों पर लगाएगी मल्टी-लेयर एंटी-ड्रोन स्टील मेश स्क्रीन

ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरे के मद्देनजर भारतीय सेना ने पश्चिमी क्षेत्र में स्थित संवेदनशील सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी कर ली है। सेना इन ठिकानों पर मल्टी-लेयर एंटी-ड्रोन स्टील मेश स्क्रीन लगाने जा रही है।

ये स्क्रीन मौजूदा गन, लेजर और जैमर सिस्टम के साथ मिलकर छोटे ड्रोन, कामिकाजे ड्रोन और ड्रोन स्वार्म को रोकने के लिए सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत के रूप में काम करेंगी।

सेना द्वारा 25 सितंबर को जारी रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन के अनुसार ये ओवरहेड स्क्रीन लगभग 37 मीटर लंबी और 20 मीटर चौड़ी होंगी। इनमें अलग-अलग प्रकार की स्टील मेश की तीन परतें होंगी, जिनके बीच पर्याप्त दूरी रखी जाएगी।

इस डिजाइन का उद्देश्य आने वाले हवाई खतरे को पहले इंटरसेप्ट करना, उसकी ऊर्जा को नष्ट करना और फिर उसे पूरी तरह रोकना है, ताकि वह इमारत तक न पहुंच सके।

बाहरी परत में कैमोफ्लेज और छलावरण की व्यवस्था होगी। नॉन-रिफ्लेक्टिव कोटिंग्स और मल्टी-स्पेक्ट्रल कैमोफ्लेज पेंट का इस्तेमाल कर इन्हें आसपास के इलाके से मिलाया जाएगा, जिससे विजुअल और थर्मल सिग्नेचर कम हो सके।

ये स्क्रीन कमांड सेंटर्स और गोला-बारूद भंडारण जैसी महत्वपूर्ण संरचनाओं के ऊपर कंक्रीट या धातु के ढांचे पर लगाई जाएंगी। प्रारंभिक तैनाती पश्चिमी क्षेत्र के कई स्थानों पर की जाएगी।

रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में भारत-पाकिस्तान सीमा पर 863 ड्रोन घुसपैठ के मामले दर्ज किए गए, जिनमें से ज्यादातर पंजाब और राजस्थान में हुए। इस दौरान 237 ड्रोन गिराए गए।

सेना पहले से ही फ्रंटलाइन उपकरण, बंकर, आर्टिलरी और वाहनों पर स्टील मेश तथा सिंथेटिक नेट का इस्तेमाल कर रही है। नई स्क्रीन मौजूदा सक्रिय एंटी-ड्रोन सिस्टम की पूरक साबित होंगी।

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