छत्तीसगढ़

शासकीय कार्यों में लापरवाही पर पटवारी मिथलेश वर्मा निलंबित, कलेक्टर ने जारी किया आदेश

कोरबा,01 नवम्बर 2026। शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही, निर्धारित दायित्वों का निर्वहन नहीं करने और लगातार अनुपस्थित रहने के मामले में कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सख्त कार्रवाई करते हुए पटवारी मिथलेश वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मिथलेश वर्मा पटवारी हल्का नंबर 40 भैरोताल, तहसील दर्री में पदस्थ थे। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील अजगरबहार निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटवारी मिथलेश वर्मा को शासकीय कार्यों में लापरवाही और उदासीनता के संबंध में कार्यालयीन पत्र क्रमांक 1673/भू.अ./पट.स्था./2026 के माध्यम से 1 अक्टूबर 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में भू-अभिलेख नियमावली के अनुसार दैनिक डायरी का संधारण नहीं करने, किसानों से संबंधित एग्रीस्टैक पंजीयन तथा बकेट क्लेम डिजिटल कॉप मोबाइल ऐप में प्रविष्टि का कार्य प्रारंभ नहीं करने जैसी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।

इसके अलावा नक्शा बंटाकन और अभिलेख दुरुस्ती के कार्य लंबित रखने तथा खरीफ वर्ष 2025-26 की मैनुअल गिरदावरी से संबंधित कार्य पीवी के माध्यम से नहीं किए जाने को भी गंभीर लापरवाही माना गया। संबंधित पटवारी ने 5 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय की भू-अभिलेख शाखा में अपना जवाब प्रस्तुत किया था, लेकिन अधिकारियों ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं पाया।

मामले में एक और गंभीर तथ्य सामने आया कि पटवारी 13 अक्टूबर 2026 से लगातार अपने शासकीय कर्तव्यों से अनुपस्थित थे। उनकी अनुपस्थिति के कारण चक्रवात अर्नब से प्रभावित फसलों के नुकसान का आकलन करने तथा धान खरीदी शुरू होने से पहले किसानों की समस्याओं के निराकरण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए।

प्रशासन ने इन गतिविधियों को शासकीय सेवा में व्यवधान उत्पन्न करने और पदीय दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही की श्रेणी में माना है। इसके चलते छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3(1) एवं 3(क), (ख) और (ग) के उल्लंघन पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है। कलेक्टर की इस कार्रवाई को शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के प्रति प्रशासन के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।

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