विदेशियों की ब्लैकलिस्टिंग का दायरा बढ़ा, साइबर अपराध से बाल तस्करी और आतंक फंडिंग तक नए आधार शामिल

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026: गृह मंत्रालय ने विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट करने और भारत में प्रवेश या ठहराव से इनकार करने के दिशानिर्देशों का दायरा बढ़ाया है। संशोधित ढांचे में साइबर अपराध, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, बाल तस्करी, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी रैकेटियरिंग, आतंक या विध्वंसक गतिविधियों को वित्तीय सहायता, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला को स्पष्ट आधार बनाया गया है।
News18 की रिपोर्ट के अनुसार, ये दिशानिर्देश उस समय तैयार और जारी किए गए थे, जब अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक भारत में हिरासत में थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इन्हें 13 मार्च 2026 को गिरफ्तार किया था। आरोप था कि इन्होंने म्यांमार स्थित सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण दिया। एनआईए ने शुरुआत में आतंक विरोधी प्रावधान लगाए। बाद के आरोपपत्र में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए, जबकि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत जांच खुली रही। सितंबर में दिल्ली की अदालत ने सातों को डिफॉल्ट जमानत दी और शर्तों के साथ एक महीने के लिए अमेरिका व यूक्रेन जाने की अनुमति दी।
नए ढांचे में क्या जोड़ा गया
पहले भी गंभीर अपराध, इमिग्रेशन उल्लंघन, फर्जी दस्तावेज और सुरक्षा से जुड़ी गतिविधियों पर विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता था। पिछले वर्ष तैयार आदेश में भारत-विरोधी गतिविधियां, जासूसी, आतंकवाद और विध्वंसक गतिविधि, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, फर्जी यात्रा दस्तावेज तथा करेंसी रैकेटियरिंग (क्रिप्टोकरेंसी सहित) के साथ साइबर अपराध और बाल शोषण भी प्रवेश या ठहराव से इनकार के आधारों में थे।
ताजा समेकित दिशानिर्देशों में इन बातों को और स्पष्ट किया गया है:
- साइबर अपराध
- बच्चों के साथ दुर्व्यवहार
- मानव तस्करी के दायरे में बाल तस्करी को अलग से शामिल करना
- क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी रैकेटियरिंग, जिसे करेंसी रैकेटियरिंग के साथ जोड़ा गया है
- आतंकवादी या विध्वंसक गतिविधियों को वित्तीय सहायता देना
- ऐसे मामलों में मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला
1 सितंबर 2025 को अधिसूचित इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स ऑर्डर, 2025 भी जासूसी, आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध, बाल शोषण और करेंसी (क्रिप्टोकरेंसी सहित) रैकेटियरिंग जैसे मामलों में प्रवेश या ठहराव से इनकार की अनुमति देता है। नए इमिग्रेशन कानून के तहत ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन को उन विदेशियों की अद्यतन सूची रखनी है जिनके प्रवेश पर रोक है। सूचीबद्ध मामलों की समय-समय पर समीक्षा का प्रावधान है और प्रभावित व्यक्ति गृह मंत्रालय के समक्ष अभ्यावेदन दे सकता है।
ग्रेड ए, बी, सी और डी बरकरार
ब्लैकलिस्टिंग की मौजूदा चार श्रेणियां जारी हैं। गंभीरता के अनुसार अलग-अलग श्रेणी और मंजूरी का स्तर लागू होता है।
ग्रेड ए: सबसे गंभीर मामले। इसमें गंभीर सुरक्षा और आपराधिक अपराधों में दोषी या शामिल पाए गए विदेशी, सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक माने गए व्यक्ति, यूएपीए के तहत गैरकानूनी घोषित संगठनों के सदस्य, संयुक्त राष्ट्र की ब्लैकलिस्टिंग आवश्यकताओं के तहत आने वाले व्यक्ति, तथा फर्जी या धोखाधड़ी से प्राप्त यात्रा दस्तावेज या वीजा के निर्दिष्ट मामले शामिल हैं। कार्रवाई गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के अधिकारी, अथवा ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त कर सकते हैं।
ग्रेड बी: भारतीय कानून के तहत तीन वर्ष से कम कारावास वाले अपराधों में दोषी या शामिल विदेशी, इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के अपराधों को छोड़कर। इसमें इस अधिनियम और उसके नियमों, आदेशों व निर्देशों का बार-बार उल्लंघन, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के नागरिकों से जुड़े निर्दिष्ट वीजा उल्लंघन (छह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए बताए गए अपवाद के साथ), फेमा उल्लंघन, अन्य वित्तीय अनियमितताएं, अवैध फंडिंग और कर चोरी भी आते हैं।
ग्रेड डी: निचले स्तर के निर्दिष्ट मामले। इनमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के नागरिकों का 90 दिन तक का कुछ ओवरस्टे या पंजीकरण न कराना (उसी अपवाद के साथ) और भारतीय कानून के अन्य छोटे अपराध शामिल हैं।
दिशानिर्देशों में यह भी कहा गया है कि सात वर्ष तक की उम्र के विदेशी नाबालिगों को ब्लैकलिस्ट नहीं किया जाएगा। इमिग्रेशन अधिकारियों को धमकाने, गाली देने या प्रक्रिया में बाधा डालने पर कार्रवाई केवल दुर्लभ मामलों में, स्पष्ट दस्तावेजी सबूत और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त की पूर्व मंजूरी के बाद की जा सकती है।
इन दिशानिर्देशों का मकसद डिजिटल अपराध, बाल सुरक्षा और आतंक से जुड़ी वित्तीय गतिविधियों को पारंपरिक इमिग्रेशन उल्लंघनों के साथ ही प्रवेश-नियंत्रण का स्पष्ट आधार बनाना है। ग्रेड प्रणाली और समीक्षा का प्रावधान पहले की तरह बना हुआ है।



