छत्तीसगढ़

जमीन रजिस्ट्री में भ्रष्टाचार के आरोप से दिवंगत सब रजिस्ट्रार को हाईकोर्ट ने बरी किया

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 8 अक्टूबर। जमीन की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सरकार को स्टांप ड्यूटी का नुकसान पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराए गए दुर्ग के तत्कालीन सब रजिस्ट्रार आरके नेताम को हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा।

आरके नेताम की अपील लंबित रहने के दौरान 23 जुलाई 2022 को मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी पत्नी सुनीता नेताम को मुकदमा जारी रखने की अनुमति दी गई।

मामला वर्ष 2006 में सामने आया था। गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने एंटी करप्शन ब्यूरो में शिकायत की थी कि उनकी बहन आशा लता उर्फ आशा रानी की दुर्ग के पुलगांव में करीब 27.3 एकड़ जमीन थी। आरोप था कि निर्मला देवी अग्रवाल ने अमेरिका में तैयार कथित पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की अलग-अलग बिक्री रजिस्ट्रियां कराईं।

तत्कालीन सब रजिस्ट्रार आरके नेताम पर जरूरी स्टांप ड्यूटी जमा हुए बिना दस्तावेजों का पंजीयन करने का आरोप लगाया गया था। इससे सरकार को 6 लाख 8 हजार 115 रुपये के राजस्व नुकसान की बात कही गई थी।

इस मामले में नेताम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत आरोप लगाए गए थे।

हाईकोर्ट ने पाया कि नेताम और निर्मला देवी अग्रवाल के बीच पहले से किसी समझौते, बातचीत, वित्तीय लेन-देन या अनुचित लाभ के लेन-देन का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला। कई गवाहों ने भी अभियोजन के आरोपों की पुष्टि नहीं की।

जांच अधिकारी ने स्वीकार किया था कि जमीन की मालिक और कुछ महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए गए थे। कथित पॉवर ऑफ अटॉर्नी का मूल दस्तावेज भी जब्त नहीं किया गया था।

कोर्ट ने कहा कि रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों की जांच में कथित लापरवाही या प्रक्रियागत चूक को अतिरिक्त ठोस सबूत के बिना आपराधिक भ्रष्टाचार नहीं माना जा सकता। किसी बिक्री विलेख का पंजीयन हो जाना अपने आप में धोखाधड़ी या आपराधिक साजिश साबित नहीं करता।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मजबूत संदेह भी सबूत की जगह नहीं ले सकता। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर कोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द कर दिया तथा सुनीता नेताम की ओर से जारी अपील में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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