सुप्रीम कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की याचिका पर केंद्र और बंगाल सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की कृष्णानगर लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार को एक हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिका में क्षेत्र दौरे के दौरान सुरक्षा, नदिया सर्किट हाउस से रात में कमरा खाली कराने के आरोप और एमपीलैड्स कार्यों में रुकावट का मामला उठाया गया है।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार दोनों की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि वे जवाब दाखिल करेंगे। अदालत ने निर्देश दिया कि एक हफ्ते में जवाब दिया जाए और उसके बाद याचिकाकर्ता एक हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकती है। मामला इसके बाद दो हफ्ते बाद सुनवाई के लिए आएगा।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सांसद के व्यक्तिगत मुद्दे अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में नहीं उठाए जा सकते। उन्होंने कहा कि देश में 500 से अधिक सांसद हैं और यदि हर सांसद योजनाओं के क्रियान्वयन या आवास जैसे मामलों में शीर्ष अदालत पहुंचे, तो कठिनाई पैदा होगी। उन्होंने औपचारिक नोटिस जारी न करने का भी अनुरोध किया, ताकि मामले को अनावश्यक तूल न मिले।
पीठ ने 1 सितंबर के एक पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपनी चिंता साझा कर रही है। अदालत ने पूछा कि क्या सांसद को सर्किट हाउस आने से तीन दिन पहले सूचना देनी जरूरी है।
याचिका में क्या कहा गया
मोइत्रा की याचिका में आरोप है कि 14 अगस्त 2026 की रात नदिया जिला प्रशासन ने कृष्णानगर सर्किट हाउस में आवंटित कमरा होने के बावजूद उन्हें देर रात परिसर खाली करने को कहा। उनका दावा है कि संसद सत्र के बाद क्षेत्र में रात रुकने के लिए उन्हें कमरा दिया गया था, फिर भी खाली करने का निर्देश आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कृष्णानगर में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड्स) के तहत सुझाए कार्यों में बाधा डाली जा रही है। याचिका में क्षेत्र दौरे के दौरान पर्याप्त सुरक्षा की मांग भी की गई है।
मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि कमरा खाली करने से इनकार करने के बाद सर्किट हाउस के बाहर भीड़ जुटी और नारेबाजी हुई। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी और नदिया के जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी तथा नजरेथ डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस भी दिया था। उनके अनुसार, यह कार्रवाई संसदीय कर्तव्य निभाने में बाधा डालने की कोशिश का हिस्सा थी।
मोइत्रा के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि याचिकाकर्ता लोकसभा सांसद हैं और मामला संवैधानिक दायित्वों से जुड़ा है। अगस्त में जब मामला उल्लेख के लिए आया था, तब यह भी कहा गया था कि उच्च न्यायालय के सुरक्षात्मक आदेश के बावजूद देर रात कार्रवाई हुई।
मामले की पृष्ठभूमि
महुआ मोइत्रा पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी सांसद हैं। विवाद 14 अगस्त की उस रात से जुड़ा है, जब वे क्षेत्र मुख्यालय के सरकारी सर्किट हाउस में रुकी थीं। प्रशासन की ओर से रखरखाव और सफाई का हवाला देते हुए परिसर उपलब्ध न होने का आदेश बताए जाने का दावा किया गया था। मोइत्रा का कहना है कि उन्हें पहले कमरा दे दिया गया था और देर रात खाली कराने का निर्देश सुरक्षा तथा प्रोटोकॉल दोनों दृष्टि से अनुचित था।
अदालत ने इस चरण में किसी पक्ष के आरोप पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है। केंद्र और राज्य सरकार के जवाब तथा मोइत्रा के जवाबी हलफनामे के बाद अगली सुनवाई होगी।



